
आर्टेमिस II मिशन: 53 साल बाद चांद की ओर इंसानों की वापसी की तैयारी
आर्टेमिस II अपने विविध क्रू और आधुनिक दृष्टि के साथ, अपोलो मिशनों के 53 साल बाद मानवता की चांद की यात्रा में एक नए युग की शुरुआत करने के लिए तैयार है; जानिए इससे जुड़ी हर अहम जानकारी।
1 अप्रैल 2026 तक NASA का आर्टेमिस II रॉकेट फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड LC-39B पर तैयार खड़ा है। यही वह लॉन्च पैड है, जहां से नील आर्म्सट्रॉन्ग पने ऐतिहासिक मिशन पर रवाना हुए थे।
चारों अंतरिक्ष यात्री फिलहाल क्वारंटीन में हैं। फरवरी में आई तकनीकी दिक्कतों को दूर कर लिया गया है। मौसम अनुकूल रहने पर 2 अप्रैल को सुबह 3:54 बजे (भारतीय समय) लॉन्च होगा।
अगर मिशन सफल रहा, तो 53 साल बाद पहली बार इंसान लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर जाएंगे।
53 साल बाद चांद की ओर वापसी
अब तक करीब 650 लोग पृथ्वी की कक्षा में जा चुके हैं, लेकिन सिर्फ 24 इंसान ही चांद तक पहुंचे हैं। इनमें से 12 ने चांद पर कदम रखा, जबकि बाकी 12 सिर्फ उसकी परिक्रमा कर लौट आए।
दिसंबर 1972 में Apollo 17 के बाद कोई भी इंसान लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर नहीं गया। आर्टेमिस II इस सिलसिले को तोड़ेगा।
NASA का नया Space Launch System अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। यह चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर जाएगा।
इस मिशन की खास बात इसकी विविधता भी है- पहला अश्वेत अंतरिक्ष यात्री विक्टर ग्लोवर, पहली महिला क्रिस्टीना कोच और पहला कनाडाई जेरमी हैनसेन।
मिशन का उद्देश्य क्या है?
आर्टेमिस II चांद पर लैंडिंग मिशन नहीं है। यह 10 दिन का “फ्री-रिटर्न लूनर फ्लाईबाय” मिशन है।
इसका मतलब है कि यान चांद के पास जाएगा। उसकी परिक्रमा करेगा और बिना अतिरिक्त ईंधन खर्च किए, चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति से पृथ्वी पर लौट आएगा
अंतरिक्ष यात्रियों की जिम्मेदारियां
इनमें जो चार अंतरिक्ष यात्री हैं, उनमें रीड वाइजमैन मिशन कमांडर हैं जिनकी सभी फैसलों की जिम्मेदारी होगी। विक्टर ग्लोवर पायलट हैं जोकि यान को नियंत्रित करेंगे। क्रिस्टीना कोच वैज्ञानिक प्रयोग और अवलोकन करेंगी जबकि जेरमी हैनसेन सिस्टम और इमरजेंसी उपकरण संचालन करेंगे।
बैकअप क्रू में आंद्रे डगलस और जेनी सिडी गिब्बन्स शामिल हैं।
अंतरिक्ष में 10 दिन का जीवन
ओरियन कैप्सूल काफी छोटा है—लगभग एक वैन जितना। चार लोग 10 दिन तक इसी में रहेंगे। दीवार से जुड़े स्लीपिंग बैग, सीमित जगह, 6 खिड़कियां और स्टोरेज जो रेडिएशन शेल्टर का काम करेगा
इनकी दिनचर्या ऐसी होगी कि अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के समय के बजाय “मिशन एलैप्स्ड टाइम” (MET) फॉलो करेंगे।
रोजाना सिस्टम चेक करना होगा। 30 मिनट तक अनिवार्य एक्सरसाइज करनी होगी। वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएँगे और चांद का अवलोकन किया जाएगा। 7वें दिन उन्हें कुछ व्यक्तिगत समय भी मिलेगा।
खाना और स्वच्छता
अंतरिक्ष यात्रियों का पूरा खाना पैक्ड होगा। जिसमें 189 प्रकार के भोजन और पेय होंगे। उन्हें कोई ताजा खाना नहीं मिलेगा। मेन्यू में शामिल मैकरोनी, वेज क्विच, बीफ, टॉर्टिला, कुकीज़।
जहां तक अंतरिक्ष यात्रियों की साफ-सफाई की बात है तो उन्हें 10 दिन तक नहाना नहीं है। वेट वाइप्स और ड्राई शैंपू इस्तेमाल करने हैं और
खास डिजाइन वाला टॉयलेट ही उपयोग में लाएंगे।
मिशन के अहम पल
Day 2: ट्रांस-लूनर इंजेक्शन (चांद की ओर प्रस्थान)
Day 5-6: सबसे दूर जाने का रिकॉर्ड
Day 6: चांद के पीछे का हिस्सा (फार साइड) देखना
इस दौरान 30–50 मिनट तक पृथ्वी से संपर्क टूट जाएगा।
वापसी का खतरनाक सफर
इस मिशन में सबसे खतरनाक है पृथ्वी पर लौटना। उस समय यान की गति 11 किमी/सेकंड रहेगी। अत्यधिक गर्मी होगी और प्लाज्मा के कारण रेडियो ब्लैकआउट होंगे। इसके बाद पैराशूट खुलेंगे और यान प्रशांत महासागर में उतरेगा।
जहां तक जोखिम और चुनौतियों का सवाल है तो इस मिशन में रेडिएशन का खतरा रहेगा। नई लाइफ सपोर्ट सिस्टम की टेस्टिंग, सीमित जगह में 10 दिन रहना और चांद के पीछे संचार बाधित होना, ये बड़ी चुनौती है।
तो कुल मिलाकर आर्टेमिस II मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि मानव इतिहास में एक नई शुरुआत है। यह मिशन भविष्य में चांद पर फिर से इंसानों को उतारने की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित हो सकता है।

