
चंद्रमा की ओर 10 दिन का सफर, आर्टेमिस-II मिशन का आगाज
आर्टेमिस-II मिशन के जरिए 53 साल बाद इंसान लो-अर्थ ऑर्बिट से आगे बढ़ा। इसे भविष्य में चंद्रमा पर मानव वापसी की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन (Artemis II mission) गुरुवार (2 अप्रैल) तड़के सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह ऐतिहासिक उड़ान फ्लोरिडा स्थित Kennedy Space Center के लॉन्च पैड LC-39B से हुई—वही स्थान, जहां से कभी नील आर्मस्ट्रांग (Neil Armstrong) अपने ऐतिहासिक मिशन पर रवाना हुए थे। इस लॉन्च के साथ 53 वर्षों बाद पहली बार इंसान निम्न-पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) से बाहर निकले हैं।
भारतीय समयानुसार सुबह 3:54 बजे Space Launch System रॉकेट को प्रज्वलित किया गया, जिसने अत्याधुनिक अंतरिक्ष यान ओरियन स्पेसक्रॉफ्ट (Orion spacecraft) को कक्षा में स्थापित किया। चार सदस्यीय दल अब चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है। यह दस दिवसीय मिशन भविष्य में चंद्रमा पर मानव वापसी के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाएगा।
अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय
31 मार्च 2026 तक लगभग 650 मनुष्य अंतरिक्ष में 100 किलोमीटर से ऊपर जाकर पृथ्वी की परिक्रमा कर चुके हैं। इनमें से केवल 24 ही चंद्रमा तक पहुँचे हैं, और उनमें से 12 ने चंद्रमा पर कदम रखा। बाकी केवल उसकी कक्षा में घूमकर लौटे। दिसंबर 1972 में हुए Apollo 17 के बाद से कोई भी इंसान लो-अर्थ ऑर्बिट से आगे नहीं गया था—अब Artemis II mission इस इतिहास को बदल रहा है।
दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट
स्पेस लॉन्च सिस्टम अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जाता है। इसके लॉन्च, बूस्टर अलग होने और ओरियन के पृथक्करण को दुनियाभर में लाखों लोगों ने देखा। इस मिशन की एक खास बात इसकी समावेशिता भी है—इसमें चंद्र मिशन पर पहली महिला, पहला अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और पहला कनाडाई शामिल हैं।
मिशन का उद्देश्य
यह मिशन चंद्रमा पर उतरने के लिए नहीं है, बल्कि “फ्री-रिटर्न लूनर फ्लाईबाय” है। इसका मतलब है कि अंतरिक्ष यान चंद्रमा के दूर वाले हिस्से के पास से घूमकर वापस लौटेगा। इसमें ईंधन बचाने के लिए चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का “स्लिंगशॉट” प्रभाव इस्तेमाल किया जाएगा।
दल और उनकी जिम्मेदारियां
मिशन के कमांडर रीड वाइज़मैन (Reid Wiseman) हैं, जो पूरे मिशन का नेतृत्व करेंगे। पायलट विक्टर ग्लोवर (Victor Glover) अंतरिक्ष यान को नियंत्रित करेंगे और महत्वपूर्ण इंजन बर्न संभालेंगे। मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच (Christina Koch) स्वास्थ्य प्रयोगों और चंद्रमा की तस्वीरों का कार्य देखेंगी। वहीं जेरेमी हैनसेन (Jeremy Hansen), जो कनाडा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, सिस्टम संचालन और सुरक्षा प्रक्रियाओं में सहयोग करेंगे।
सीमित जगह में जीवन
ओरियन कैप्सूल का आकार काफी छोटा है—लगभग एक छोटी वैन जितना। इसमें चार लोग 10 दिन तक रहेंगे। करीब 330 घन फीट जगह में सोना, खाना, काम करना और शौच करना होगा। दीवारों पर स्लीपिंग बैग, सीमित स्टोरेज और छह खिड़कियाँ ही उनकी दुनिया होंगी।
अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के समय के बजाय “मिशन एलैप्स्ड टाइम” (MET) का पालन करेंगे। दिन की शुरुआत सिस्टम चेक से होगी—पानी, हवा, भोजन और जीवन-समर्थन प्रणाली की जांच। रोज़ाना कम से कम 30 मिनट का व्यायाम अनिवार्य होगा ताकि माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव को कम किया जा सके।
भोजन और स्वच्छता
सभी भोजन पहले से पैक किए गए हैं—जैसे मैक एंड चीज़, वेजिटेबल क्विच, बारबेक्यू बीफ आदि। कोई ताजा खाना या फ्रिज नहीं होगा। पानी मिलाकर भोजन तैयार किया जाएगा। स्वच्छता के लिए गीले तौलिये और विशेष शौचालय का उपयोग होगा—नहाने की सुविधा नहीं है।
मिशन के महत्वपूर्ण दिन
दूसरे दिन बड़ा इंजन बर्न अंतरिक्ष यान को चंद्रमा की ओर भेजेगा। पांचवें और छठे दिन अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से सबसे दूर जाने का रिकॉर्ड बना सकते हैं। छठे दिन यान चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से से गुजरेगा और कुछ समय के लिए पृथ्वी से संपर्क टूट जाएगा।
वापसी का रोमांच
अंतिम दिन ओरियन पृथ्वी के वातावरण में लगभग 11 किमी/सेकंड की रफ्तार से प्रवेश करेगा। अत्यधिक गर्मी और दबाव के बाद पैराशूट खुलेंगे और यान प्रशांत महासागर में उतरेगा।
जोखिम और चुनौतियां
इस मिशन में विकिरण, सीमित जगह, नए जीवन-समर्थन सिस्टम और संचार ब्लैकआउट जैसी कई चुनौतियाँ हैं। चंद्रमा के पीछे जाने पर संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा। इसके अलावा वापसी के दौरान प्लाज्मा परत के कारण भी कुछ समय तक रेडियो संपर्क संभव नहीं होगा।
ऐतिहासिक शुरुआत
आर्टेमिस II मिशन (Artemis II mission) सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक नई शुरुआत है। यह मिशन चंद्रमा के साथ “दूसरे हनीमून” की तरह है—जो भविष्य में मानव के चंद्रमा पर स्थायी ठिकाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

