
नेपाल चुनाव में बालेन शाह की लहर, शुरुआती रुझानों में RSP आगे
नेपाल चुनाव के शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की RSP करीब 10 सीटों पर आगे है, जबकि नेपाली कांग्रेस और UML पीछे दिख रहे हैं। यह नतीजे देश की राजनीति में बदलाव के संकेत दे रहे हैं।
Nepal Elections Result: नेपाल के आम चुनाव के शुरुआती रुझान देश की राजनीति में संभावित बदलाव की ओर संकेत दे रहे हैं। शुरुआती आंकड़ों में बालेन शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को उल्लेखनीय बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। प्रारंभिक रुझानों के अनुसार पार्टी 47 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि पारंपरिक राजनीतिक दल नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) सिर्फ एक-एक सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं। यह स्थिति नेपाल की स्थापित राजनीतिक व्यवस्था के प्रति बढ़ती असंतोष की भावना को भी दर्शाती है।
गुरुवार यानी 5 मार्च को हुए मतदान में लाखों लोगों ने भाग लिया और लगभग 60 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह जेन-Z के नेतृत्व में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पहला आम चुनाव है। इन प्रदर्शनों ने केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था। इसी पृष्ठभूमि में भ्रष्टाचार विरोध, सुशासन, और राजनीतिक सुधार जैसे मुद्दे इस चुनाव के केंद्र में रहे।
भारत भी इस चुनावी प्रक्रिया पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि नेपाल की राजनीतिक स्थिरता का क्षेत्रीय रणनीति और द्विपक्षीय संबंधों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने चुनावों के शांतिपूर्ण आयोजन की सराहना करते हुए नेपाल की सरकार और जनता को बधाई दी है।
राजनीतिक परिदृश्य में सबसे दिलचस्प पहलू बालेन शाह का उभार है। काठमांडू के पूर्व मेयर और पूर्व रैपर रहे शाह की पार्टी, जो 2022 में बनी थी, अपेक्षाकृत कम समय में ही एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विकल्प के रूप में सामने आई है। शुरुआती रुझानों से संकेत मिलता है कि पारंपरिक दलों के प्रति जनता की निराशा का लाभ इस नई राजनीतिक ताकत को मिल रहा है।
हालांकि सत्ता की दौड़ में अन्य प्रमुख चेहरे भी मौजूद हैं। नेपाली कांग्रेस ने गगन थापा को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है, जबकि सीपीएन (यूएमएल) ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को अपना चेहरा बनाया है। इससे यह चुनाव पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व और उभरती नई राजनीतिक ताकतों के बीच प्रतिस्पर्धा का रूप लेता दिख रहा है।
संरचनात्मक रूप से देखें तो नेपाल की प्रतिनिधि सभा की कुल 275 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। इनमें से 165 सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली (First Past The Post) के जरिए चुने जाते हैं, जबकि 110 सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) से चुने जाते हैं। प्रत्यक्ष सीटों के लिए लगभग 3,400 उम्मीदवार और आनुपातिक प्रणाली के लिए 3,135 उम्मीदवार मैदान में हैं। देश में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 1.89 करोड़ है।
इसके अलावा कुछ क्षेत्रीय और उभरती राजनीतिक ताकतें भी चुनावी मैदान में हैं, जैसे कुलमान घिसिंग की उज्यालो नेपाल पार्टी और धरान के पूर्व मेयर हरका संपंग की श्रम शक्ति पार्टी। हालांकि इन दलों का प्रभाव फिलहाल सीमित क्षेत्रों तक ही माना जा रहा है।
समग्र रूप से देखें तो यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की संभावना नहीं, बल्कि नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव और नई राजनीतिक संस्कृति की मांग का भी संकेत देता है। पिछले 18 वर्षों में 14 सरकारों के बदलने का तथ्य देश की राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है। ऐसे में इन चुनावों के नतीजे यह तय कर सकते हैं कि नेपाल पारंपरिक दलों के प्रभुत्व को बनाए रखता है या नई राजनीतिक शक्तियों के लिए व्यापक राजनीतिक स्थान तैयार करता है।

