
बांग्लादेश नेशनल इलेक्शन: आंकड़ों की बाजीगरी या लोकतंत्र का उत्सव?
18 महीने के बवाल के बाद वोटिंग संपन्न; चुनाव आयोग के दावों पर उठे गंभीर सवाल, शेख हसीना की अवामी लीग ने लगाया 'डेटा फिक्सिंग' का आरोप, यूनुस बोले- यह बांग्लादेश का पुनर्जन्म।
Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में गुरुवार, 12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय चुनावों ने आंकड़ों की एक नई बहस को जन्म दे दिया है। चुनाव आयोग ने अंततः देश में 55 से 60 प्रतिशत के बीच मतदान होने की संभावना जताई है। हालांकि, देश के विभिन्न जिलों से आई रिपोर्टें इस दावे से बिल्कुल मेल नहीं खाती हैं। जमीन पर मौजूद पत्रकारों और प्रत्यक्षदर्शियों ने मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा होने की जानकारी दी है। मतदान के दिन सुबह से ही केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें बेहद छोटी दिखाई दी थीं। इसके बावजूद, चुनाव आयोग के आंकड़ों में दोपहर के बाद भारी उछाल दर्ज किया गया। इस विसंगति ने चुनाव की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने इस चुनाव को देश का नया जन्म बताया है। वहीं, चुनाव से बाहर रखी गई अवामी लीग ने इसे आंकड़ों की बाजीगरी करार दिया है। पूरे देश में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच यह मतदान संपन्न हुआ है।
पिछले चुनावी रुझानों से बिल्कुल अलग स्थिति
1991 से बांग्लादेश के चुनावों को कवर करने वाले विशेषज्ञों ने इस बार के रुझान को बेहद अजीब बताया है। पिछले सभी चुनावों में मतदान के शुरुआती चार घंटों में सबसे अधिक भीड़ देखी जाती थी। दोपहर के भोजन के बाद आमतौर पर मतदान की गति काफी धीमी हो जाती थी। लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने सुबह 11 बजे केवल 14.96 प्रतिशत मतदान दर्ज किया था। इसके ठीक एक घंटे बाद 12 बजे यह आंकड़ा बढ़कर 32.88 प्रतिशत हो गया। दोपहर 2 बजे तक आयोग ने इसे 47 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। अंत में इसे 60 प्रतिशत के करीब बताया जाना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। पत्रकारों ने कई बूथों पर आधे घंटे तक इंतजार किया, लेकिन एक भी वोटर नहीं दिखा।
खाली बूथ और फर्जी वोटिंग की गंभीर शिकायतें
ढाका विश्वविद्यालय जैसे व्यस्त इलाकों में भी मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। एक बंगाली दैनिक की पत्रकार ने बताया कि वह 30 मिनट तक खड़ी रहीं, पर कोई नहीं आया। ग्रामीण इलाकों में मतदान प्रतिशत शहरी क्षेत्रों की तुलना में कुछ बेहतर जरूर था। लेकिन वहां भी यह सामान्य चुनावों के मुकाबले काफी कम दर्ज किया गया है। कई केंद्रों पर उन लोगों को वापस लौटा दिया गया, जिनका वोट पहले ही डल चुका था। पुलिस ने कई स्थानों पर फर्जी वोटरों को खदेड़ा और कुछ को गिरफ्तार भी किया। "नाइट वोटिंग" और मतपत्रों को पहले से भरने की खबरें भी दिन भर चलती रहीं। चुनावी नतीजों की शीट पर पहले ही हस्ताक्षर किए जाने के आरोप भी लगे हैं।
राजनीतिक दलों के बीच आरोप और प्रत्यारोप का दौर
चुनाव में मुख्य रूप से दो गठबंधन आमने-सामने हैं। एक का नेतृत्व बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और दूसरे का जमात-ए-इस्लामी कर रहा है। दोनों ने कम मतदान के लिए "झूठे दुष्प्रचार" को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने हिंसा की अफवाहों को मतदाताओं के न आने का मुख्य कारण बताया। दूसरी तरफ, अवामी लीग ने इस पूरी प्रक्रिया को अवैध और दिखावटी बताया है। अवामी लीग की प्रवक्ता रोकैया प्राची ने कहा कि लोग अवामी लीग को वापस चाहते हैं। पार्टी का दावा है कि उनके वफादार वोट बैंक ने चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार किया है। उनके अनुसार, यूनुस सरकार चुनाव को सफल दिखाने के लिए आंकड़े बढ़ा रही है।
तारिक रहमान की वापसी और भविष्य की सरकार
बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान दिसंबर 2025 में निर्वासन से वापस लौटे हैं। वह चुनाव में अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह संघर्ष के बजाय आम सहमति से देश चलाना चाहते हैं। वह सभी दलों को साथ लेकर एक "राष्ट्रीय सरकार" बनाने का विकल्प खुला रख रहे हैं। हालांकि, जमात-ए-इस्लामी के साथ उनके भविष्य के रिश्तों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने भी सरकार को सहयोग देने की बात कही है। देश अब 18 महीने की अनिश्चितता के बाद एक निर्वाचित सरकार की उम्मीद कर रहा है।
नए संविधान और जनमत संग्रह का मंडराता खतरा
चुनाव के साथ-साथ एक जनमत संग्रह भी आयोजित किया गया था। यदि इसमें "हां" का वोट मिलता है, तो देश को नया संविधान मिल सकता है। यह नया संविधान जुलाई चार्टर पर आधारित होने की संभावना है। इसका सीधा अर्थ 1972 के धर्मनिरपेक्ष संविधान का अंत हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे बांग्लादेश के लोकतांत्रिक स्वरूप में बड़ा बदलाव आएगा। आने वाले दिनों में निर्वाचित सरकार पर नए संविधान के लिए भारी दबाव होगा। फिलहाल, पूरी दुनिया को अंतिम चुनाव परिणामों और सटीक आंकड़ों का इंतजार है।

