
खार्ग द्वीप पर हमले के बाद ईरान का पलटवार, दुबई-कुवैत निशाने पर
मध्य पूर्व युद्ध के 16वें दिन दुबई में धमाके और कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले हुए। ईरान के मिसाइल-ड्रोन हमलों से खाड़ी के तेल ठिकानों और कई देशों में तनाव बढ़ गया।
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के 16वें दिन रविवार को हालात और तनावपूर्ण हो गए। दुबई के मरिना और अल सुफूह इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैरा तेल टर्मिनल पर ईरानी हमलों के बाद कामकाज कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। वहीं कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर भी कई ड्रोन हमले किए गए, हालांकि किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
फुजैरा में उठे काले धुएं के गुबार
फुजैरा से घने काले धुएं के गुबार उठते देखे गए। आग पर काबू पाने के लिए दमकलकर्मी कई घंटों तक लगातार कोशिश करते रहे। अधिकारियों के अनुसार इस घटना में एक जॉर्डन के नागरिक के घायल होने की सूचना है। दुबई के मीडिया कार्यालय के मुताबिक, ये तेज आवाजें ईरान की ओर से दागे गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में किए गए एयर डिफेंस इंटरसेप्शन के कारण सुनाई दीं। इससे पहले शनिवार को भी दुबई के मध्य हिस्सों में ऐसे धमाकों की आवाजें सुनी गई थीं, जबकि शुक्रवार को शहर के व्यस्त डाउनटाउन इलाके में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आई थीं।
अमेरिकी हमले के बाद बढ़ा तनाव
रविवार के ये हमले उस समय हुए जब अमेरिका ने ईरान के अहम खार्ग द्वीप पर हमला किया था। यह द्वीप ईरान के लगभग 90 प्रतिशत तेल के प्रसंस्करण का केंद्र माना जाता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस हमले में सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया, हालांकि ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
यूएई पर ईरान के लगातार हमले
इस संघर्ष के दौरान ईरान ने यूएई पर 1800 से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जो इस युद्ध में किसी भी देश पर किए गए सबसे ज्यादा हमले माने जा रहे हैं। इनमें करीब 1600 ड्रोन, 294 बैलिस्टिक मिसाइल और 15 क्रूज मिसाइल शामिल हैं। इन हमलों में अब तक छह लोगों की मौत और 141 लोग घायल हो चुके हैं। सिर्फ शनिवार को ही यूएई की ओर नौ बैलिस्टिक मिसाइल और 33 ड्रोन दागे गए।
इन लगातार हमलों के चलते यूएई की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। पुलिस ने लोगों को अफवाहें फैलाने, सुरक्षा या संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें खींचने या सोशल मीडिया पर साझा करने से सख्ती से मना किया है। इसी बीच, यूएई ने ऐसे वीडियो पोस्ट करने के आरोप में 10 विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है।
खाड़ी के ऊर्जा ठिकानों को बनाया गया निशाना
ईरानी हमलों में खाड़ी क्षेत्र के कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया। इनमें कुवैत से लेकर ओमान तक के ऊर्जा ठिकाने शामिल हैं। इसके अलावा सऊदी अरब की विशाल रास तनुरा रिफाइनरी, कतर के रास लफ्फान गैस प्रोसेसिंग बेस और यूएई के रुवैस रिफाइनरी परिसर को भी हमलों का लक्ष्य बनाया गया।
ईरान ने बंदरगाह खाली करने की दी चेतावनी
शनिवार तक ईरान ने पहली बार यूएई को सीधे चेतावनी देते हुए तीन प्रमुख बंदरगाहों को खाली करने के लिए कहा था। ईरान का दावा है कि इन बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिका हमलों के लिए कर रहा है इसलिए ये वैध सैन्य लक्ष्य हैं।
इज़राइल और बहरीन में भी धमाके
इसी बीच इज़राइल के तेल अवीव में भी जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जब ईरान ने मिसाइलों की बौछार की। वहीं बहरीन की राजधानी मनामा में भी कई विस्फोट हुए। बहरीन के मुताबिक, ईरानी हमलों की शुरुआत से अब तक उसने 125 मिसाइल और 203 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया है। हमलों के बाद के वीडियो पोस्ट करने के आरोप में वहां छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।लगातार बढ़ते तनाव के कारण अप्रैल में बहरीन और सऊदी अरब में होने वाली फॉर्मूला वन रेस भी रद्द कर दी गई है।
सऊदी और जॉर्डन भी निशाने पर
सऊदी अरब के अल-खार्ज सैन्य अड्डे, जहां अमेरिकी सेना तैनात है, पर भी मिसाइल हमला किया गया। वहीं जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसने ईरान द्वारा दागी गई 85 मिसाइलों और ड्रोन में से 79 को हवा में ही मार गिराया।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता
इस बीच ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर भी वैश्विक चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और इज़राइल लगातार ईरान पर हमले कर इस नाकेबंदी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि दुनिया के जिन देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल मिलता है, उन्हें इस मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
स्विट्ज़रलैंड ने अमेरिकी अनुरोध ठुकराया
वहीं अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी तटस्थ नीति बनाए रखते हुए स्विट्ज़रलैंड ने अमेरिका के दो अनुरोधों को खारिज कर दिया। अमेरिका ने मध्य पूर्व युद्ध से जुड़ी सैन्य कार्रवाइयों के लिए अपने विमानों को स्विट्ज़रलैंड के हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति मांगी थी।

