
अवामी लीग की गैरमौजूदगी में BNP का शानदार प्रदर्शन, तारिक रहमान की वापसी तय
बांग्लादेश चुनाव में BNP को भारी बहुमत के बाद तारिक रहमान के पीएम बनने का रास्ता साफ हो गया है। इस चुनाव में अवामी लीग बाहर थी।
Bangaladesh Election Result: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शुक्रवार को हुए संसदीय चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। पिछले 18 महीनों से राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहे देश में अब स्थिर सरकार बनने की उम्मीद बढ़ गई है। इस भारी बहुमत के साथ BNP प्रमुख तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। रहमान पिछले कई वर्षों से देश से बाहर रह रहे थे। बांग्लादेश के चुनावी नतीजों पर पीएम नरेंद्र मोदी ने बीएनपी और तारिक रहमान को बधाई दी है।
तारिक रहमान की वापसी और प्रमुख वादे
करीब 17 वर्षों से निर्वासन में रह रहे तारिक रहमान अब सत्ता की दहलीज पर हैं। उन्होंने देश में कानून का राज स्थापित करने, प्रशासनिक सुधार लाने और गारमेंट्स सेक्टर को पुनर्जीवित करने के लिए “नया रास्ता” अपनाने का वादा किया है। हालांकि, जमात-ए-इस्लामी ने पूरी ताकत झोंकी, लेकिन राजनीतिक विश्लेषणों के अनुसार वह सरकार बनाने की स्थिति में नहीं पहुंच सकी।
सीटों की स्थिति
रिपोर्ट्स के मुताबिक BNP ने 151 सीटें जीत ली हैं और 120 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। जमात-ए-इस्लामी को 43 सीटें मिली हैं।
कुल सीटें और मतदान
बांग्लादेश संसद में कुल 350 सीटें हैं, जिनमें 50 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इन पर सीधे मतदान नहीं होता। 300 सामान्य सीटों में से इस बार 299 पर मतदान हुआ, क्योंकि एक उम्मीदवार के निधन के कारण एक सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया।
पूर्व प्रधानमंत्रियों की गैरमौजूदगी
आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब चुनाव में न तो शेख हसीना थीं और न ही खालिदा जिया।खालिदा जिया का पिछले वर्ष निधन हो गया, जबकि शेख हसीना अगस्त 2024 के बाद भारत चली गई थीं।
अवामी लीग पर रोक और कम मतदान
अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोका गया। माना जाता है कि पार्टी का 35–40% वोट बैंक अब भी प्रभावी है। सिर्फ 48% मतदान दर्ज होना बहिष्कार की अपील के असर की ओर इशारा करता है।
11-पार्टी गठबंधन की चुनौती
BNP का मुख्य मुकाबला जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन से था। पहले जमात, BNP की सहयोगी रही थी। NCP, जो शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बनी, चुनाव में प्रभाव छोड़ने में असफल रही।
संभावित ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व
BNP के गायेश्वर चंद्र रॉय 1971 के बाद ढाका से पहले हिंदू सांसद बन सकते हैं। ढाका-3 सीट पर उनकी मजबूत बढ़त बताई जा रही है।
दोहरी मतदान प्रक्रिया
इस बार मतदाताओं ने दो वोट डाले। एक सांसद चुनने के लिए दूसरा मोहम्मद यूनुस के “जुलाई चार्टर रेफरेंडम” के लिए। जुलाई चार्टर में संसद को द्विसदनीय बनाना, प्रधानमंत्री के लिए अधिकतम दो कार्यकाल और चुनाव से 90 दिन पहले केयरटेकर सरकार बनाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
दो-तिहाई बहुमत का दावा
स्थानीय मीडिया के अनुसार, BNP और उसके सहयोगियों ने 211 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को 70 सीटें और अन्य दलों को 6 सीटें मिली हैं।
जश्न पर संयम
तारिक रहमान ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे विशेष प्रार्थना करें, लेकिन कोई विजय रैली या सार्वजनिक जश्न न मनाएं।
जमात की प्रतिक्रिया
जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान ने कहा है कि यदि मौजूदा रुझान बरकरार रहते हैं तो पार्टी परिणाम स्वीकार करेगी। उन्होंने कहा कि अंतिम नतीजों से पहले निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
यह चुनाव बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है। BNP की निर्णायक जीत और तारिक रहमान की संभावित वापसी से नई राजनीतिक दिशा तय हो सकती है। हालांकि, कम मतदान और अवामी लीग की अनुपस्थिति भविष्य की स्थिरता को लेकर कुछ सवाल भी खड़े करती है।

