
America-Iran War: मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने झोंकी पूरी ताकत, इसी हफ्ते होगा ईरान पर हमला?
मिडिल ईस्ट में में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में 2003 के इराक आक्रमण के बाद का सबसे बड़ा हवाई सैन्य जमावड़ा किया है। इससे युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
America Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच युद्द का खतरा बढ़ता जा रहा है। मिडिल ईस्ट में युद्ध की चिंगारी किसी भी वक्त भड़क सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब इतना बढ़ गया है कि अमेरिका ने 2003 में इराक युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट में अपना सबसे बड़ा सैन्य बल तैनात किया है। इतनी बड़ी सैन्य लामबंदी से युद्द का खतरा काफी ज़्यादा बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर हैं, जहाँ उनके एक फैसले से पूरे क्षेत्र का नक्शा बदल सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैयारी किसी छोटे ऑपरेशन के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े सैन्य हमले की तरफ इशारा कर रही है। अमेरिकी सेना इस हफ्ते के अंत तक किसी भी संभावित कार्रवाई के लिए फुल अलर्ट पर रह सकती है। ऐसे में युद्ध की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।
जहां एक तरफ डिप्लोमैटिक स्तर पर बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, जिसमें ईरान अपने परमाणु ठिकानों की किलेबंदी करता नज़र आ रहा है।
ईरान की 'अंडरग्राउंड' तैयारी
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) द्वारा जारी हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि ईरान अपने न्यूक्लियर ठिकानों को कंक्रीट और मिट्टी के नीचे दबाकर मजबूत बंकरों में बदल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार:पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स: यहाँ 'तालेघन 2' फैसिलिटी को मिट्टी के नीचे छिपाया जा रहा है। नतांज न्यूक्लियर प्लांट: यहाँ भी सुरक्षा घेरा मजबूत किया जा रहा है। एस्फ़हान कॉम्प्लेक्स: यहाँ टनल के एंट्री गेट्स को छिपाने की कोशिश की जा रही है, जिस पर पिछले साल जून में हमला हुआ था।
अमेरिका की सैन्य घेराबंदी
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत झोंक दी है। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 50 से ज्यादा फाइटर जेट (F-22, F-35 और F-16) इलाके में भेजे गए हैं। USS अब्राहम लिंकन युद्धपोत पहले से ही तैनात है। हवा में ईंधन भरने वाले रिफ्यूलिंग टैंकर्स की आवाजाही भी बढ़ गई है।
बातचीत का दौर भी जारी
तनाव के बीच जिनेवा में अप्रत्यक्ष बातचीत का दूसरा दौर संपन्न हुआ। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिए हैं कि दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए हैं। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह परमाणु मुद्दे और प्रतिबंधों को हटाने की अपनी शर्तों पर कायम है। अब दुनिया की नज़रें तीसरे दौर की बैठक पर टिकी हैं।

