
ट्रंप का गाजा पीस बोर्ड: मेलोनी से एर्दोगन तक, किन नेताओं को मिला न्योता? देखें पूरी लिस्ट
Trump Gaza plan: विश्लेषकों का कहना है कि यह योजना गाजा में तबाही झेल रहे लोगों के लिए यह फिलहाल एक उम्मीद की तरह भी देखी जा रही है, लेकिन असली परीक्षा आने वाले समय में इस योजना के अमल और निष्पक्षता की होगी।
Gaza Board of Peace: गाजा की तकदीर अब वोट से नहीं, बल्कि बोर्डरूम से तय होगी। शांति का दावा तो हो रहा है, लेकिन फैसले फिलिस्तीनियों के हाथ में नहीं है। अमेरिका ने गाजा के लिए एक नया शांति प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन किया जाएगा। इसको लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक रूपरेखा सामने रखी है। यह बोर्ड ट्रंप की गाजा को लेकर बनाई गई 20-सूत्रीय योजना को लागू करने के लिए बनाया गया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने इजराइल-गाजा युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता वाली योजना के दूसरे चरण की शुरुआत की है। इस 'बोर्ड ऑफ पीस' में अरबपतियों और इजराइल के करीबी लोगों को शामिल किया गया है।
इस ढांचे के टॉप पर “फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव काउंसिल” होगी, जिसके अध्यक्ष खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होंगे। यह परिषद फंडिंग, रणनीति और फैसलों पर अंतिम अधिकार रखेगी। ट्रंप के पास वीटो पावर भी होगा। वहीं, अमेरिका ने भारत को गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोरे ने एक मैसेज शेयर किया है, जिसमें उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बोर्ड ऑफ पीस में भाग लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आमंत्रित किया है। राजदूत सर्जियो गोरे ने एक्स में कहा कि मुझे गर्व है कि मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आमंत्रण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे रहा हूं, ताकि वे बोर्ड ऑफ पीस में भाग लें, जो गाजा में स्थायी शांति लाएगा। यह बोर्ड प्रभावशाली शासन का समर्थन करेगा, जिससे स्थिरता और समृद्धि प्राप्त होगी."
बोर्ड के अन्य सदस्य
मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री)– ट्रंप प्रशासन में इजराइल के सबसे बड़े समर्थक
स्टीव विटकॉफ– ट्रंप के करीबी और गाजा सीज़फायर वार्ता के दूत
जार्ड कुशनर– ट्रंप के दामाद, इजराइल समर्थक और ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ के सूत्रधार
मार्क रोवन– अरबपति निवेशक और इजराइल समर्थक कारोबारी
अजय बंगा– विश्व बैंक के अध्यक्ष
टोनी ब्लेयर– ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री
रॉबर्ट गेब्रियल जूनियर– अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
ट्रंप ने मिस्र, तुर्किये और जॉर्डन के नेताओं को भी इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया है। इसके अलावा अर्जेंटीना और कनाडा जैसे देशों को भी बोर्ड में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थायी सदस्य बनने के लिए देशों से कम से कम 1 अरब डॉलर देने को कहा गया है।
गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड
इसके नीचे गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड होगा, जो क्षेत्रीय समन्वय और प्रशासनिक सहयोग का काम करेगा। इस बोर्ड में स्टीव विटकॉफ, जार्ड कुशनर, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, कतर और मिस्र के वरिष्ठ अधिकारी, टोनी ब्लेयर, मार्क रोवन, यूएई की मंत्री रीम अल-हाशिमी, संयुक्त राष्ट्र की गाजा समन्वयक सिग्रिड काग और इजराइली-नागरिक रियल एस्टेट कारोबारी याकिर गबाय को शामिल किया गया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह बोर्ड गाजा में प्रभावी शासन और बेहतर सेवाओं को सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
फिलिस्तीनी प्रशासन
इस पूरे ढांचे में फिलिस्तीनियों की भूमिका सबसे नीचे रखी गई है। नेशनल कमिटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) नाम की 12 सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। ये सदस्य अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, न्याय, आंतरिक सुरक्षा, पानी, आवास और दूरसंचार जैसे विभाग संभालेंगे। इस समिति का नेतृत्व अली शाथ कर रहे हैं, जो पहले फिलिस्तीनी प्राधिकरण में उप-मंत्री रह चुके हैं।
इजराइल की नाराजगी
हालांकि यह योजना अमेरिका के नेतृत्व में है, लेकिन इसमें तुर्किये और कतर की मौजूदगी को लेकर इजराइल ने आपत्ति जताई है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि इस बोर्ड के गठन पर इजराइल से कोई समन्वय नहीं किया गया। इजराइल के कुछ नेताओं ने इसे सुरक्षा के लिए खतरा बताया है, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि यह नाराज़गी ज़्यादातर औपचारिक है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
गाजा के राजनीतिक विश्लेषक इयाद अल-क़र्रा का कहना है कि यह ढांचा फ़िलिस्तीनी मुद्दे पर कॉरपोरेट कब्जे जैसा है। उनके मुताबिक, ट्रंप गाज़ा को एक मातृभूमि नहीं, बल्कि दिवालिया कंपनी की तरह देख रहे हैं, जिसे नए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल
इस ढांचे के साथ-साथ एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल भी बनाया गया है, जिसका नेतृत्व अमेरिकी जनरल जैस्पर जेफ़र्स करेंगे। इस बल का एक मुख्य उद्देश्य “स्थायी निरस्त्रीकरण” बताया गया है। विशेषज्ञों को डर है कि बिना राजनीतिक समाधान के यह कदम नए टकराव को जन्म दे सकता है।

