
ग्रीनलैंड पर नरमी, टैरिफ से पीछे हटे ट्रंप, नाटो डील के बाद यू-टर्न
डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो के साथ आर्कटिक सुरक्षा समझौते के बाद यूरोप पर टैरिफ की धमकी वापस ली। ग्रीनलैंड मुद्दे पर बाजारों और यूरोप को राहत मिली।
Donald Trump on EU Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह कई यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की अपनी धमकी वापस ले रहे हैं। उन्होंने इसके पीछे नाटो के साथ आर्कटिक सुरक्षा को लेकर बने एक नए ढांचे का हवाला दिया। यह अचानक बदला हुआ रुख उस बयान के तुरंत बाद सामने आया, जिसमें ट्रंप ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) को संबोधित करते हुए कहा था कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के लिए बल प्रयोग नहीं करेगा।
जब उनसे पूछा गया कि यह समझौता कितने समय तक चलेगा, तो ट्रंप ने साफ कहा कि यह दीर्घकालिक है। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा सौदा है जो हमेशा के लिए है। इसे अनंत समझौता कहा जा सकता है।” इससे पहले अपने भाषण में ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर “अधिकार, स्वामित्व और मालिकाना हक” हासिल करने की अपनी महत्वाकांक्षा दोहराई थी और नाटो सहयोगियों से इसमें बाधा न डालने का आग्रह किया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इनकार करने पर गठबंधन को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
70 मिनट का WEF भाषण
स्विट्ज़रलैंड में आयोजित वैश्विक अभिजात वर्ग की वार्षिक बैठक में ट्रंप का संबोधन मुख्य रूप से अमेरिका में महंगाई को काबू में करने और घरेलू अर्थव्यवस्था को गति देने के प्रयासों पर केंद्रित होना था। हालांकि, उनका 70 मिनट से अधिक लंबा भाषण अन्य देशों के प्रति उनकी शिकायतों पर अधिक केंद्रित रहा।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को ग्रीनलैंड के मुद्दे पर आठ यूरोपीय संघ देशों पर नए टैरिफ लगाने की ट्रंप की योजना को गलती बताया और ट्रंप की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यूरोपीय संघ जवाबी कार्रवाई के तौर पर अपने सबसे शक्तिशाली आर्थिक हथियारों में से एक, जिसे आम तौर पर व्यापारिक बाज़ूका कहा जाता है, का इस्तेमाल कर सकता है।
यह हमारा मामला नहीं- पुतिन
इस बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वह ग्रीनलैंड के मुद्दे को लेकर चिंतित नहीं हैं। बुधवार देर रात राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में अपने टेलीविजन संबोधन में उन्होंने कहा, “ग्रीनलैंड के साथ क्या होता है, यह हमारा मामला नहीं है।”
पुतिन ने कहा, वैसे भी, डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड के साथ एक उपनिवेश की तरह व्यवहार किया है और उसके प्रति कठोर, यदि क्रूर नहीं तो, रहा है। लेकिन यह पूरी तरह अलग विषय है और मुझे नहीं लगता कि इस समय किसी की इसमें खास रुचि है। यह निश्चित रूप से हमें चिंतित नहीं करता। मुझे लगता है कि वे इसे आपस में सुलझा लेंगे।
उन्होंने याद दिलाया कि 1917 में डेनमार्क ने वर्जिन आइलैंड्स को अमेरिका को बेच दिया था। पुतिन ने यह भी याद किया कि 1867 में रूस ने अलास्का को 7.2 मिलियन डॉलर में अमेरिका को बेच दिया था।
अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी
यूरोप पर ग्रीनलैंड से जुड़े टैरिफ लगाने की धमकी वापस लेने के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में जोरदार उछाल आया।बुधवार को एसएंडपी 500 सूचकांक 1.2 प्रतिशत चढ़ गया, जब ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर एक समझौते का ढांचा तैयार कर लिया है। इस सूचकांक ने एक दिन पहले हुए नुकसान का लगभग आधा हिस्सा वापस पा लिया। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज भी 1.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में भी इतनी ही तेजी देखी गई। बॉन्ड बाजार में ट्रेजरी यील्ड में नरमी आई, जिसे जापान में सरकारी बॉन्ड यील्ड के शांत होने से भी सहारा मिला।
यूरोप को राहत
वित्तीय बाजार ही नहीं, बल्कि यूरोप भी राहत की सांस ले रहा है। ग्रीनलैंड और डेनमार्क की संप्रभुता की रक्षा को लेकर यूरोपीय सहयोगियों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी वापस लेने के ट्रंप के फैसले से कई अमेरिकी अधिकारी भी राहत महसूस कर रहे हैं।
इन अधिकारियों को ट्रंप के ग्रीनलैंड, डेनमार्क और अन्य नाटो सहयोगियों के प्रति सख्त रुख और आक्रामक बयानबाजी को लेकर चिंता थी। उन्हें डर था कि इससे अमेरिका के अन्य विदेश नीति लक्ष्यों को नुकसान पहुंच सकता है। अधिकारियों का मानना था कि किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड हासिल करने पर ट्रंप का अत्यधिक ध्यान, शांति बोर्ड के गठन के प्रयासों को जटिल बना रहा है। यह बोर्ड गाजा युद्धविराम की निगरानी के लिए बनाया जाना है और इसके गुरुवार को दावोस में घोषित होने की संभावना है।
भारतीय बाजारों को राहत की उम्मीद
WEF के दौरान ट्रंप ने भारत के साथ चल रही वार्ता प्रक्रिया को लेकर भरोसा जताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को रेखांकित किया। भारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते पर उनकी हालिया टिप्पणियों से भारतीय शेयर बाजारों में उम्मीद जगी है। निवेशक बातचीत में आगे की प्रगति का इंतजार कर रहे हैं।
ग्रीनलैंड को लेकर तनाव कम होने के बाद घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 50 के आज ऊंचे स्तर पर खुलने की उम्मीद है। भारत-यूरोपीय संघ संभावित व्यापार समझौता भी बाजार की धारणा को मजबूत कर सकता है।बुधवार को भारतीय शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स 0.33 प्रतिशत गिरकर 81,909.63 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 0.3 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 25,157.50 पर बंद हुआ।

