USA-Israel Vs Iran : ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं. रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमले के बाद दुबई में भी ड्रोन से हमला किया गया है। ईरान और इजरायल की इस जंग का सबसे बुरा असर अब खाड़ी देशों पर पड़ रहा है। ईरान अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सेनाओं को निशाना बनाते हुए लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है। दुबई में अमेरिकी सेना के रहने वाली एक बिल्डिंग पर आत्मघाती ड्रोन से हमले का भयावह वीडियो सामने आया है। वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि कैसे एक ड्रोन रिहायशी इमारतों को टारगेट कर विस्फोट कर देता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सभी अमेरिकी सैनिक इस हमले में सुरक्षित बताए जा रहे हैं। इन हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा और डर का माहौल पैदा कर दिया है।
दुबई की इमारत पर ड्रोन से अटैक का वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में एक ईरानी 'शाहेद' ड्रोन इमारतों के ऊपर से उड़ता दिखाई दे रहा है। ड्रोन ने जैसे ही लक्षित इमारत को हिट किया, वैसे ही एक जोरदार धमाका हुआ। धमाके के साथ ही आग की ऊंची लपटें उठने लगीं और आसपास मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। यह दृश्य इतना डरावना है कि इसे देखकर क्षेत्र में तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। ईरान का दावा है कि वह इन हमलों के जरिए केवल विदेशी सैन्य कर्मियों को निशाना बना रहा है। फिलहाल, वहां मौजूद सुरक्षा एजेंसियां नुकसान का आकलन करने में जुटी हुई हैं।
ऑस्ट्रेलियाई सैन्य बेस 'अल मिन्हाद' पर हमला
ईरान ने दुबई की रिहायशी इमारतों के अलावा ऑस्ट्रेलियाई सैन्य बेस 'अल मिन्हाद' को भी निशाना बनाया है। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने इस हमले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अल मिन्हाद एयरबेस पर ईरानी सेना ने ड्रोन से प्रहार किया है। इस बेस पर बड़ी संख्या में ऑस्ट्रेलियाई सैनिक तैनात हैं। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि हमले के वक्त वहां मौजूद सभी 100 सैनिक सुरक्षित हैं। उनकी गिनती पूरी कर ली गई है और वे पूरी तरह सुरक्षित बंकरों में तैनात हैं। ऑस्ट्रेलिया ने अपने नागरिकों और सैन्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए हाई अलर्ट जारी किया है।
ईरान-इजरायल युद्ध का खाड़ी देशों पर असर
ईरान और इजरायल की इस लड़ाई में खाड़ी देश युद्ध के मैदान में तब्दील होते जा रहे हैं। रियाद के बाद अब दुबई जैसे वैश्विक व्यापारिक केंद्र पर हमला होना बड़ी चिंता का विषय है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों को छोड़ना नहीं चाहता। इन हमलों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों पर भी खतरा मंडराने लगा है। दुबई जैसे शहर में इस तरह की अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी गहरा असर पड़ सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञ इसे युद्ध का खतरनाक विस्तार मान रहे हैं।
ट्रंप की चेतावनी और जवाबी कार्रवाई की तैयारी
अमेरिकी दूतावास और सैन्य ठिकानों पर हुए इन हमलों के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के सबसे बड़े हमले अभी होने बाकी हैं। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वे ईरान की धरती पर अपनी सेना भी उतार सकते हैं। अमेरिका ने अब तक ईरान के 1250 से अधिक ठिकानों पर बमबारी की है। युद्ध के इस चौथे दिन में हिंसा और अधिक बढ़ती जा रही है। खाड़ी देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शांति की अपील की है, लेकिन फिलहाल युद्ध थमने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं।