मैक्रों की दो टूक : सीरियस बनें, हर दिन न बोलें ट्रम्प
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मैक्रों की दो टूक : 'सीरियस बनें, हर दिन न बोलें ट्रम्प'

फ्रांस के राष्ट्रपति ने ट्रंप को बताया 'भ्रम फैलाने वाला'। नाटो से निकलने की ट्रंप की धमकी पर मैक्रों ने जताई कड़ी आपत्ति। होर्मुज में सैन्य कार्रवाई को बताया खतरनाक।


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Strait Of Hormuz : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दक्षिण कोरिया की राजकीय यात्रा पर पहुंचे मैक्रों ने ट्रंप की कार्यशैली पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे हर दिन विरोधाभासी बयान देकर दुनिया में भ्रम फैला रहे हैं। मैक्रों ने तंज कसते हुए यहाँ तक कह दिया कि ट्रंप को शायद 'हर दिन नहीं बोलना चाहिए'। मिडिल ईस्ट के तनाव और नाटो (NATO) के भविष्य को लेकर ट्रंप की बदलती बयानबाजी ने यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ा दी है। मैक्रों का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने की खुली धमकी दे चुके हैं।


'ट्रंप ने नाटो की साख मिट्टी में मिला दी'
मैक्रों ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने नाटो के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता पर "हर दिन संदेह" पैदा करके इस गठबंधन को खोखला कर दिया है। ट्रंप ने हाल ही में नाटो को 'पेपर टाइगर' (कागजी शेर) करार दिया था और कहा था कि अमेरिका का इस गठबंधन से बाहर निकलना अब 'पुनर्विचार से परे' है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका ने नाटो पर खरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन जब ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में सहयोग की बात आई, तो सहयोगियों ने हाथ पीछे खींच लिए। मैक्रों ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि आप अपनी प्रतिबद्धता पर रोज शक पैदा करेंगे, तो गठबंधन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

होर्मुज संकट: 'ताकत का इस्तेमाल करना नादानी होगी'
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सैन्य बल से मुक्त कराने के ट्रंप के विचार को मैक्रों ने 'अवास्तविक' बताया है। मैक्रों के अनुसार:

सैन्य जोखिम: सैन्य ऑपरेशन में बहुत समय लगेगा और यह जहाजों को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बैलिस्टिक मिसाइल खतरों के सामने ला खड़ा करेगा।

ईरान की ताकत: हालांकि ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान की नौसेना तबाह हो गई है, लेकिन हकीकत यह है कि ईरान अब भी दुनिया की 20% गैस और तेल आपूर्ति को रोकने की क्षमता रखता है।

समाधान: मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यह केवल ईरान के साथ मिलकर ही किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले युद्धविराम और बातचीत की बहाली जरूरी है।

ट्रंप की 'कन्फ्यूजन' वाली राजनीति
मैक्रों ने ट्रंप को नसीहत देते हुए कहा कि जब आप गंभीर होना चाहते हैं, तो आप आज वह नहीं कहते जो कल कहा था। ट्रंप की 'डेली टॉक' यानी हर दिन बोलने की आदत ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को एक सर्कस में बदल दिया है। ट्रंप का यह कहना कि अमेरिका को नाटो से कुछ हासिल नहीं हुआ, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों को नागवार गुजरा है। मैक्रों ने चेतावनी दी है कि दिशाहीन होकर हर तरफ बयानबाजी करने से केवल अस्थिरता बढ़ेगी।

ईरान का 'नॉन-होस्टाइल' देशों पर दांव
इस बीच तेहरान ने अपना रुख साफ कर दिया है। ईरान का कहना है कि वह केवल उन 'गैर-शत्रु' देशों के जहाजों को गुजरने देगा जो ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं हैं और न ही उसका समर्थन करते हैं। यह स्थिति भारत और अन्य एशियाई देशों के लिए राहत भरी हो सकती है, लेकिन पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है। मैक्रों ने साफ कर दिया है कि बिना बातचीत के बल प्रयोग करना किसी बड़े आत्मघाती कदम से कम नहीं होगा।


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