
Gen Z आंदोलन के बाद नेपाल की राजनीति बदली, RSP का दबदबा
नेपाल में Gen Z आंदोलन के बाद हुए आम चुनाव में बालेंद्र शाह की RSP 20 सीटें जीतकर 98 पर आगे है, जिससे पारंपरिक दलों का दबदबा टूटता दिख रहा है।
रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह की नवगठित राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) नेपाल में जनरेशन-Z के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद हुए पहले आम चुनाव में बड़ी जीत की ओर बढ़ती दिख रही है। इस परिणाम ने देश की पारंपरिक और स्थापित राजनीतिक पार्टियों के प्रभुत्व को चुनौती दी है।
चुनाव आयोग के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, RSP अब तक 20 सीटें जीत चुकी है और 98 अन्य सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील हिमालयी देश नेपाल में यह चुनाव भारत की भी करीबी निगरानी में है। भारत को उम्मीद है कि नेपाल में एक स्थिर सरकार बनेगी, जिससे दोनों देशों के बीच विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने गुरुवार को दिल्ली में कहा, “हम नेपाल की नई सरकार के साथ मिलकर काम करने और दोनों देशों तथा उनके लोगों के बीच मजबूत और बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने की उम्मीद करते हैं, ताकि पारस्परिक लाभ सुनिश्चित हो सके।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने हमेशा नेपाल में शांति, प्रगति और स्थिरता का समर्थन किया है। इसी प्रतिबद्धता के तहत, भारत ने नेपाल सरकार के अनुरोध पर इन चुनावों के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता और सामग्री भी उपलब्ध कराई।
चुनाव परिणामों की बात करें तो नेपाली कांग्रेस ने अब तक चार सीटें जीती हैं और 11 अन्य सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं CPN-UML ने एक सीट जीती है और 11 निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रही है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने दो सीटें जीती हैं और 10 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। दूसरी ओर श्रम संस्कृति पार्टी, जो पहले छह सीटों पर आगे थी, अब केवल तीन सीटों पर ही बढ़त बनाए हुए है।
इन चुनावों में 165 सीटों के लिए प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत लगभग 3,400 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि 110 सीटों के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत 3,135 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। कुल 275 सदस्यीय संसद में से 165 सदस्य प्रत्यक्ष मतदान से और 110 सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से चुने जाएंगे।
नेपाल के इस चुनाव में लगभग 1.89 करोड़ मतदाता 275 प्रतिनिधियों को चुनने के पात्र थे। गुरुवार को हुए मतदान में लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।पिछले वर्ष 8 और 9 सितंबर को हुए दो दिवसीय तीव्र Gen Z विरोध प्रदर्शनों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को सत्ता से बाहर कर दिया था। उस समय ओली नेपाली कांग्रेस के समर्थन से गठबंधन सरकार चला रहे थे, जिसके पास लगभग दो-तिहाई बहुमत था।
ओली के पद से हटने के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 12 सितंबर को प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया और सुशीला कार्की को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया। Gen Z युवाओं ने अपने आंदोलन के दौरान कई प्रमुख मुद्दे उठाए, जिनमें भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख, सुशासन की मांग, भाई-भतीजावाद का अंत, राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव और पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख थे।
(एजेंसी इनपुट के साथ)

