
Iran की नई धमकी से पूरी दुनिया में मची हलचल, जानिए क्या है Bab el-Mandeb Strait और ये क्यों है जरुरी?
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में नया सैन्य मोर्चा खोल सकता है। क्या है बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य ? कैसे पूरी दुनिया के लिए पैदा कर सकता है गंभीर संकट?
Bab el-Mandeb Strait : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर एक बार फिर युद्ध के काले बादल मंडराने लगे हैं। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तस्नीम' ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से खबर दी है कि यदि ईरान की मुख्य भूमि या उसके द्वीपों पर कोई हमला किया जाता है, तो ईरान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) में एक नया मोर्चा खोल सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पहले से ही लाल सागर में यमन के ईरान-समर्थित हौथी गुट के हमलों ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों की नींद उड़ा रखी है।
क्यों खास है बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य?
बाब अल-मंडेब कोई साधारण समुद्री रास्ता नहीं है। यह लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक संकरा प्रवेश द्वार है, जो स्वेज नहर की ओर जाने वाले जहाजों के लिए मुख्य मार्ग है। यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस शामिल हैं, इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर 'केप ऑफ गुड होप' से होकर लंबा चक्कर काटना पड़ेगा। इससे न केवल माल पहुँचाने का समय बढ़ जाएगा, बल्कि शिपिंग लागत में भारी वृद्धि होगी, जिसका सीधा असर दुनिया भर में ईंधन और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की लाइफलाइन
सिर्फ बाब अल-मंडेब ही नहीं, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) भी इस समय गंभीर संकट में है। दुनिया के कुल तेल और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से निकलता है। कुवैत पेट्रोलियम के सीईओ शेख नवाफ सऊद अल-सबा ने रॉयटर्स से बात करते हुए साफ कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य का कोई विकल्प नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून और व्यावहारिक वास्तविकता के तहत पूरी दुनिया का साझा रास्ता है।"
पश्चिमी देशों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि होर्मुज की रक्षा करना लाल सागर में हौथियों से लड़ने की तुलना में कहीं अधिक कठिन है। जहाँ हौथी एक विद्रोही गुट हैं, वहीं ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) एक आधुनिक और सुसज्जित सैन्य शक्ति है। उनके पास बैलिस्टिक मिसाइलें, घातक ड्रोन, समुद्री बारूदी सुरंगें और तेज़ गति वाली हमलावर नावें मौजूद हैं।
सैन्य चुनौतियाँ और आर्थिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इन समुद्री रास्तों को सुरक्षित करना एक लंबी और महंगी प्रक्रिया होगी। इसमें महीनों का समय लग सकता है और इसके लिए सैन्य एस्कॉर्ट, बारूदी सुरंगों को हटाने के अभियान और लगातार हवाई निगरानी की जरूरत होगी।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए अब तक अरबों डॉलर खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी चार जहाज डूब चुके हैं और वैश्विक शिपिंग कंपनियों का भरोसा बहाल नहीं हो पाया है। कई बड़ी कंपनियों ने अभी भी इस रूट का इस्तेमाल बंद कर रखा है।
क्या होगा अगला कदम?
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के उपायों पर चर्चा कर रहे हैं। कुछ देश बल प्रयोग की वकालत कर रहे हैं, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी सावधानी बरत रहे हैं ताकि स्थिति बड़े क्षेत्रीय युद्ध में न बदल जाए।
आज की हकीकत यह है कि समुद्री सुरक्षा अब केवल सेना का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता की धुरी बन चुकी है। यदि ये 'चोकपॉइंट्स' बंद होते हैं, तो पूरी दुनिया को एक गंभीर ऊर्जा और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

