तेल संकट 1970 बनाम 2026: क्या हालात ज्यादा खतरनाक?
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तेल संकट 1970 बनाम 2026: क्या हालात ज्यादा खतरनाक?

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। इस संकट को 1970 से बड़े ऊर्जा संकट के तौर पर बताया जा रहा है।


मौजूदा हालात वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद खतरनाक बनते जा रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया का एक अहम समुद्री मार्ग है, पिछले एक महीने से लगभग बंद पड़ा है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया एक ऐसे ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है, जो 1970 के दशक के तेल संकट से भी ज्यादा गंभीर हो सकता है।

मार्सक के पूर्व निदेशक और शिपिंग विशेषज्ञ लार्स जेन्सेन के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ऐतिहासिक स्तर का हो सकता है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने भी इसे अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा सुरक्षा खतरा बताया है।

1970 का तेल संकट: एक ऐतिहासिक सबक

1973 के योम किप्पुर युद्ध के बाद अरब देशों द्वारा लगाए गए तेल प्रतिबंध और 1979 की ईरानी क्रांति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया था। तेल की कीमतें कई गुना बढ़ीं, महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी, और कई देशों में मंदी छा गई।

आज का संकट: ज्यादा व्यापक और जटिल

मार्च 2026 के हालात और भी विस्फोटक नजर आ रहे हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। यह मार्ग दुनिया के करीब 20% तेल निर्यात के लिए जिम्मेदार है।हालांकि अमेरिका सप्लाई बहाल करने के प्रयास कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जल्द ही वैश्विक रिफाइनरियों तक पहुंचने वाला तेल खत्म हो सकता है।

क्या यह संकट 1970 से भी बड़ा है?

विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ मानते हैं कि आज की अर्थव्यवस्था अधिक लचीली है और देशों के पास रणनीतिक भंडार हैं। वहीं, अन्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि मौजूदा संकट 20% आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है, जो 1970 के 5-7% से कहीं अधिक है।

सवाल- होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

उत्तर: होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी देशों को अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद अहम और संकीर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात इसी रास्ते से होता है, इसलिए इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ता है।

सवाल- मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट का मुख्य कारण क्या है?

उत्तर: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के चलते होर्मुज मार्ग से जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

सवाल- 1970 के दशक का तेल संकट क्या था?

उत्तर: 1973 में योम किप्पुर युद्ध के दौरान अरब देशों ने इजरायल का समर्थन करने वाले देशों पर तेल प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे तेल की कीमतें चार गुना बढ़ीं और वैश्विक स्तर पर महंगाई व मंदी आ गई।

संभावित असर: महंगाई और मंदी का खतरा

अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो ईंधन की कीमतों में भारी उछाल, वैश्विक महंगाई और आर्थिक मंदी देखने को मिल सकती है। खासकर आयात पर निर्भर एशियाई देशों में। हालात बेहद नाजुक हैं। भले ही दुनिया पहले से अधिक तैयार हो, लेकिन संकट का पैमाना इतना बड़ा है कि इसका असर लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है। ऐसे में इस टकराव का जल्द समाधान ही सबसे बड़ा विकल्प नजर आता है।

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