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भारत में अमेरिकी मिशन ने ट्रम्प के कार्यकारी आदेश के बाद विदेशी सहायता की समीक्षा की
भारत में दशकों से चल रहे अमेरिकी विकास कार्यक्रम अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, क्योंकि नीति में बड़े बदलाव के बाद विदेशी सहायता जांच के दायरे में आ गई है।
Trump Rule And USAID In India : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पदभार ग्रहण करने के पहले दिन एक महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके बाद अमेरिकी मिशन ने अपने विदेश सहायता कार्यक्रमों की समीक्षा शुरू कर दी है। इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका की विदेशी सहायता को पूरी तरह से अमेरिकी विदेश नीति के अनुरूप होना चाहिए। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, भारत में लंबे समय से चल रहे अमेरिकी सहायता कार्यक्रमों, खासकर स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण जैसे अहम क्षेत्रों में व्यापक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस आदेश के तहत विदेश सहायता कार्यक्रमों पर तुरंत काम को निलंबित करने का आदेश दिया है। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) द्वारा प्राप्त एक आंतरिक केबल के मुताबिक, अमेरिका ने नए विदेशी सहायता वितरण को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है, और समीक्षा पूरी होने तक इन कार्यक्रमों पर काम रोकने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, अमेरिकी दूतावास ने भी भारत के प्रमुख मीडिया समूह *द इंडियन एक्सप्रेस* को यह जानकारी दी है कि वे अपने मौजूदा अनुदान कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे कार्यकारी आदेशों के अनुरूप हों।
USAID के प्रमुख कार्यक्रमों पर पड़ सकता है असर
भारत में अमेरिकी सरकार के कई कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने वाली एजेंसी, यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID), दशकों से भारतीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। USAID ने भारत में स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन, और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इनमें फीड द फ्यूचर, ग्लोबल हेल्थ, ग्लोबल क्लाइमेट चेंज और रेड अलायंस जैसी परियोजनाएं शामिल हैं, जो भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए बनाई गई थीं।
स्वास्थ्य क्षेत्र:
USAID ने भारत में मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के साथ-साथ तपेदिक और एड्स जैसी बीमारियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारत में तपेदिक के मामले दुनिया में सबसे अधिक हैं, और यह बीमारी यूएसएआईडी के लिए एक प्रमुख कार्य क्षेत्र रही है। USAID ने इस संकट से निपटने के लिए नए और उन्नत तकनीकी उपकरण जैसे GeneXpert रैपिड डायग्नोस्टिक मशीनें पेश की हैं। इन परियोजनाओं के स्थगित होने से लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं, जो इलाज और समर्थन पर निर्भर हैं।
कृषि और खाद्य सुरक्षा:
फीड द फ्यूचर पहल के तहत, USAID ने भारत के कृषि क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं। इनमें कम लागत वाले ट्रैक्टर, समुद्री शैवाल आधारित जैविक विकास उत्तेजक और सौर निर्जलीकरण जैसे तकनीकी समाधान शामिल हैं, जो न केवल भारत में किसानों की आय में सुधार करने के उद्देश्य से हैं, बल्कि इनका अफ्रीका और एशिया के अन्य देशों में भी प्रभाव पड़ा है। यदि इन परियोजनाओं में कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा पर पड़ेगा, जो विकासशील देशों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र:
USAID की पहल पार्टीशिप टू एडवांस क्लीन एनर्जी (PACE) के तहत भारत को एक कम उत्सर्जन और ऊर्जा-सुरक्षित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करने के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं के जरिए स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों और कार्बन पृथक्करण जैसी पहलें भारत में ऊर्जा संकट को हल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ ही, भारत के जंगलों और वन्य जीवन के संरक्षण के लिए भी USAID ने कई परियोजनाओं का समर्थन किया है।
शिक्षा:
USAID ने रीड, एंगेज, अचीव, ड्रीम अलायंस (REACH Alliance) के तहत भारत में प्राथमिक विद्यालयों में साक्षरता दर में सुधार लाने के लिए कई पहलों की शुरुआत की है। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य कम आय वाले बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना है। अगर इन पहलों को निलंबित किया जाता है, तो इसका असर भारत के ग्रामीण और कम विकसित क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर पर पड़ सकता है।
समीक्षा की प्रक्रिया और संभावित प्रभाव
फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, इस समीक्षा प्रक्रिया में लगभग 85 दिनों का समय लग सकता है, जिसके दौरान अमेरिकी सहायता कार्यक्रमों में कोई नया वितरण या वित्तीय अनुबंध जारी नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान $70 बिलियन से अधिक के विदेशी सहायता अनुबंध लटके रह सकते हैं, जिससे कई देशों में विकासात्मक परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
भारत में, विशेष रूप से स्वास्थ्य, कृषि, और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में USAID की परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है, जो पहले ही महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त कर चुकी हैं। इन कार्यक्रमों की स्थगन या बंदी से न केवल भारत में लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हो सकता है, बल्कि अमेरिका और भारत के बीच कई दशकों से चले आ रहे सहयोगात्मक संबंधों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भारत के लिए क्या मायने रखता है?
यह समीक्षा दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकती है। USAID द्वारा की जा रही पहल, जो भारतीय सरकार के साथ मिलकर देश की विकास यात्रा में सहायक रही हैं, इन परियोजनाओं में रुकावट से भारत को भविष्य में विकास के कई क्षेत्रों में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में किए गए सुधारों के स्थगित होने से भारत को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कमी का सामना भी हो सकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रम्प प्रशासन की यह नीति भारत और अन्य देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों को किस दिशा में ले जाती है, और क्या ये कार्यक्रम फिर से बहाल किए जाएंगे या फिर अमेरिका अपनी विदेश नीति में कोई बड़ा बदलाव करेगा।
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