
अरुणाचल पर चीन की हरकत: भारत ने 'फर्जी नामों' को नकारा, कहा- नहीं बदलेगी सच्चाई
विदेश मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के स्थानों का नाम बदलने की चीन की कोशिश को 'शरारतपूर्ण' करार दिया है। भारत ने कहा कि ऐसे कदमों से द्विपक्षीय संबंध खराब होंगे।
India China On Arunachal : भारत ने रविवार को चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों के लिए "काल्पनिक नाम" निर्धारित करने के कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि आधारहीन आख्यान गढ़ने से जमीनी हकीकत को नहीं बदला जा सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली चीनी पक्ष द्वारा भारतीय क्षेत्र के हिस्सों को ऐसे नाम देने के किसी भी "शरारतपूर्ण प्रयास" को स्पष्ट रूप से खारिज करती है। भारत ने जोर देकर कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।
द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा नकारात्मक असर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, चीन की ये हरकतें दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के प्रयासों को कमजोर करती हैं। रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन को ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए जो रिश्तों में नकारात्मकता घोलती हैं और आपसी समझ पैदा करने के प्रयासों को बाधित करती हैं। गौरतलब है कि साल 2020 में पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद से दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई थी। हालांकि पिछले डेढ़ साल में संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई उपाय किए गए हैं, लेकिन चीन की ऐसी हरकतें इन कोशिशों को पीछे धकेलती हैं।
चीन की पुरानी रणनीति का हिस्सा
यह पहली बार नहीं है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश के स्थानों का नाम बदलने का प्रयास किया है। चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने हाल ही में एक नई सूची जारी की है, जिसमें भारतीय क्षेत्रों के लिए 'मानकीकृत' नामों का जिक्र किया गया है। इससे पहले चीन ने 2017 में छह स्थानों, 2021 में 15 स्थानों और 2023 में 11 स्थानों की सूचियां जारी की थीं। चीन अरुणाचल प्रदेश को 'जांगनान' कहता है और इसे दक्षिण तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। भारत ने मई 2023 और अप्रैल 2024 में भी चीन की ऐसी ही हरकतों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।
अखंडता पर भारत का अटूट रुख
रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए दोहराया कि चीन के झूठे दावों से सच्चाई नहीं बदल सकती। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कई बार यह स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश पर उसका संप्रभु अधिकार है। चीन द्वारा नाम बदलने की प्रक्रिया केवल "शरारतपूर्ण प्रयास" है जिसका कोई कानूनी या ऐतिहासिक आधार नहीं है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ऐसे कदम उठाकर सीमा विवाद को जीवित रखना चाहता है और भारत पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
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