
सऊदी की तेल रिफाइनरी पर ईरान का ड्रोन अटैक, तेल संकट गहराया
अमेरिका-इजरायल युद्ध में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद खाड़ी देशों में हाहाकार मचा है। ईरान ने सऊदी की अरामको रिफाइनरी को निशाना बनाया है।
Iran - USA/Israel War Impact : ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता फैल गई है। इस घटना के प्रतिशोध में ईरान ने पश्चिमी एशिया में स्थित अमेरिकी सहयोगियों पर भीषण जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। सोमवार, 2 मार्च को ईरान के ड्रोन हमलों की आग सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी तक पहुँच गई। सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको ने हमले के बाद अपनी रास तनुरा रिफाइनरी को तत्काल बंद कर दिया है। सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि यह हमला कितना व्यापक और घातक था। रिफाइनरी के बड़े हिस्से को इस हमले में भारी नुकसान पहुँचा है। ईरान अब बंदरगाहों, हवाई अड्डों और आवासीय इमारतों को भी अपना निशाना बना रहा है। इस युद्ध ने दुनिया भर की दिग्गज तेल कंपनियों की नींद उड़ा दी है।
सऊदी अरब ने दी 'पूर्ण युद्ध' की चेतावनी
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब अब सैन्य प्रतिक्रिया की तैयारी कर रहा है। सऊदी सरकार के करीबी सूत्रों ने चेतावनी दी है कि वे ईरानी तेल सुविधाओं को निशाना बना सकते हैं। वर्तमान में सऊदी सेना को "पूर्ण अलर्ट" पर रखा गया है। यह संघर्ष अब इस बात पर टिका है कि अरामको पर हुए हमले को एक चूक माना जाए या सीधा हमला। यदि ईरानी नेतृत्व की ओर से और हमले होते हैं, तो सऊदी अरब अपनी सेना का उपयोग करेगा। रास तनुरा रिफाइनरी का बंद होना वैश्विक तेल बाजार के लिए एक बड़ा झटका है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी संपत्तियों पर भी लगातार खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है।
अबू धाबी और कतर भी युद्ध की चपेट में
ईरान का गुस्सा केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में भी एक ड्रोन ने फ्यूल टैंक टर्मिनल को निशाना बनाया। मुसाफा फ्यूल टैंक टर्मिनल पर हुए इस हमले से भीषण आग लग गई। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर तुरंत काबू पा लिया और कोई हताहत नहीं हुआ। वहीं, कतर ने सोमवार को अपनी हवाई सीमा में घुसे दो ईरानी सुखोई एसयू-24 बॉम्बर्स को मार गिराया। कतर के रक्षा मंत्रालय ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। यह पहली बार है जब किसी खाड़ी देश ने ईरानी लड़ाकू विमानों को सीधे निशाना बनाया है। इस तनाव के चलते कतर ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का उत्पादन भी रोक दिया है। इससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता संकट
खाड़ी देशों के बीच छिड़ी यह जंग अब वैश्विक स्तर पर असर दिखा रही है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह होटलों और विदेशी संपत्तियों को निशाना बनाना जारी रखेगा। पश्चिमी देशों के नागरिक अब इन देशों को छोड़कर भागने को मजबूर हैं। सऊदी अरब और ईरान के बीच सीधी जंग से पूरे मध्य पूर्व का भूगोल बदल सकता है। तेल और गैस की आपूर्ति रुकने से भारत सहित कई एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इस युद्ध को रोकने की अपील कर रही हैं। लेकिन अयातुल्लाह की मौत के बाद ईरान किसी भी समझौते के मूड में नहीं दिख रहा है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

