
सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर ईरान का ड्रोन अटैक, अरामको धुआं-धुआं हुई
ईरान के ड्रोन हमले के बाद सऊदी की इस रिफाइनरी को बंद कर दिया गया है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनई की अमेरिकी-इजरायली हमले में हुई मौत के बाद ईरान अब सबसे बदला ले रहा है। ईरान ने सऊदी अरब की सबसे प्रमुख तेल राइफनरी अरमाको को निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि ईरान ने इस रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक किया। उस ड्रोन को रोकने के दौरान गिरे मलबे से रिफाइनरी हमले की जद में आई।
सऊदी अरब सेना के एक प्रवक्ता ने सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से इसकी पुष्टि की। The Jerusalem Post ने एक रिपोर्टर के हवाले से बताया कि आग छोटी, सीमित और नियंत्रण में थी। घटनास्थल से वायरल वीडियो में हमले के बाद काला घना धुआं उठता दिखाई दिया।
हमले के बाद इस रिफाइनरी को बंद कर दिया गया, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। रविवार को क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाला शिपिंग ट्रैफिक लगभग ठप हो गया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल परिवहन करता है।
इस बीच, कुवैत में अमेरिकी F-15 विमान गिराए जाने का वीडियो भी सामने आया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि कुवैत में अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया गया। बहरीन, दुबई और दोहा में विस्फोटों की खबरें भी आई हैं। इज़रायल ने बेरूत में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी की है, जबकि खाड़ी देशों ने अपनी रक्षा करने का संकल्प जताया है।
Press TV ने यह भी बताया कि बहरीन के सलमान पोर्ट पर ईरानी मिसाइल से हमला किया गया। ईरानी मीडिया का दावा है कि इस बंदरगाह का उपयोग ईरान पर हमले के लिए अमेरिकी लॉजिस्टिक उपकरण पहुंचाने में किया जा रहा था।
ड्रोन हमले क्षेत्र में ईरान द्वारा किए गए व्यापक हमलों की कड़ी का हिस्सा थे, जिनमें अबू धाबी, दुबई, दोहा, मनामा और ओमान के व्यावसायिक बंदरगाह दुक्म को निशाना बनाया गया। एहतियात के तौर पर इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में अधिकांश तेल उत्पादन सप्ताहांत में बंद कर दिया गया।
यह संघर्ष उस समय और तेज हो गया जब अमेरिका और इज़रायल ने एक लक्षित सैन्य अभियान में आयतुल्लाह खामेनेई को मार गिराया। इसके जवाब में ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए, जिनमें अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों की सुविधाओं को निशाना बनाया गया।

