
ईरान का ताबड़तोड़ हमला, अमेरिकी-इजराइली ठिकाने निशाने पर
ईरान ने अमेरिका-इजराइल के ठिकानों को निशाना बनाते हुए 75 मिसाइलें दागी। इजराइल के डिमोना और अराद में जबरदस्त नुकसान हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब और भयंकर रूप लेने की ओर बढ़ रहा है। खबरों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका और इजराइल के ठिकानों पर एक साथ 75 मिसाइलों से हमला करने का ऐलान किया है। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई ईरान पहले भी कर चुका है।
IRGC का बड़ा ऐलान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने घोषणा की है कि इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमलों की नई लहर शुरू कर दी गई है, जिसमें 75 मिसाइलें शामिल हैं।
इजरायल की रक्षा प्रणाली नाकाम
शनिवार देर रात ईरान ने दक्षिणी इजरायल के दो इलाकों पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों में कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और कई लोग घायल हुए। ये हमले इजरायल के प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र के पास हुए इजरायली सेना डिमोना और अराद शहरों पर गिरी मिसाइलों को रोक नहीं सकीपहली बार ईरानी मिसाइलें परमाणु केंद्र के आसपास इजराइल की वायु रक्षा प्रणाली को भेदने में सफल रहीं
भारी नुकसान और घायल
बचावकर्मियों के अनुसार अराद में कम से कम 10 अपार्टमेंट इमारतों को भारी नुकसान हुआ। इनमें से 3 इमारतें गिरने के खतरे में कम से कम 64 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डिमोना परमाणु अनुसंधान केंद्र से लगभग 20 किमी पश्चिम में स्थित है, जबकि अराद करीब 35 किमी उत्तर में है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बड़ा खतरा
रविवार को ईरान और उसके सहयोगी लेबनानी संगठन हिजबुल्ला ने इजरायल पर हमले तेज कर दिए। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ऊर्जा संयंत्रों पर हमला करता है। तो वह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह बंद कर देगा। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ट्रंप का अल्टीमेटम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि 48 घंटों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलोवरना अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा। हमले की शुरुआत ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट से होगी।
ईरान का पलटवार
ट्रंप के बयान के तुरंत बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जवाब दिया। अगर अमेरिका ऊर्जा ठिकानों पर हमला करता है तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से बंद कर देगा। साथ ही, उन सभी देशों के ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाएगा जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

