ईरान में खौफ: 18 साल के अमीर को दी गई फांसी, जनवरी विद्रोह से जुड़ा था मामला
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ईरान में खौफ: 18 साल के अमीर को दी गई फांसी, जनवरी विद्रोह से जुड़ा था मामला

इजरायल और अमेरिका के इशारे पर काम करने का लगा आरोप। सैन्य ठिकाने में घुसपैठ और आगजनी के दोषी को तेहरान में दी गई मौत की सजा। अब तक 4 को मिली फांसी।


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Iran In War : ईरान में विरोध की आवाज बुलंद करने वालों के खिलाफ सरकार का सख्त रुख जारी है। गुरुवार को तेहरान में 18 साल के एक युवक अमीर हुसैन हातमी को फांसी पर चढ़ा दिया गया। हातमी पर जनवरी महीने में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान एक प्रतिबंधित सैन्य ठिकाने में घुसपैठ करने का गंभीर आरोप था। ईरान की न्यायपालिका ने दावा किया है कि इस युवक ने इजरायल और अमेरिका के बहकावे में आकर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला था। जनवरी के आंदोलनों से जुड़ी यह चौथी फांसी है, जिसने मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच एक बार फिर बहस छेड़ दी है।


सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज, कबूलनामे का दावा
ईरान के न्यायिक न्यूज पोर्टल 'मिजान' के अनुसार, अमीर हुसैन हातमी को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई, लेकिन अदालत ने सजा को बरकरार रखा। हातमी पर आगजनी करने और हथियारों के जखीरे पर कब्जा करने की कोशिश के आरोप थे। सरकारी मीडिया का कहना है कि हातमी ने अदालत के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का अक्सर यह आरोप रहता है कि ईरान में ऐसे कबूलनामे दबाव और प्रताड़ना के जरिए लिए जाते हैं।

प्रदर्शनकारियों पर कसता जा रहा है शिकंजा
जुडिशरी के डिप्टी चीफ हम्जेह खलीली ने पिछले महीने ही साफ कर दिया था कि जनवरी के विद्रोह से जुड़े मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। अब उन फैसलों को जमीन पर लागू किया जा रहा है। हातमी से पहले 19 मार्च को तीन अन्य लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है। इनमें 19 साल के अंतरराष्ट्रीय रेसलर सालेह मोहम्मदी भी शामिल थे। उन पर प्रदर्शनों के दौरान एक पुलिसकर्मी की हत्या का आरोप था। इस हफ्ते ही कुल चार लोगों को 'मुजाहिदीन ऑफ ईरान' का सदस्य होने और विद्रोह करने के जुर्म में सूली पर चढ़ाया गया है।

क्यों भड़की थी विद्रोह की आग?
ईरान में दिसंबर और जनवरी के महीने में जनता का गुस्सा फूट पड़ा था। आसमान छूती महंगाई, बेरोजगारी और तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की नीतियों के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। 8 और 9 जनवरी को यह प्रदर्शन अपने चरम पर था, जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। सरकार ने इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए भारी बल प्रयोग किया और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया। अब उन्हीं गिरफ्तारियों के बाद अदालती कार्यवाही और सजाओं का दौर चल रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी साजिश का एंगल
ईरानी प्रशासन हमेशा से अपने देश में होने वाले आंतरिक विद्रोहों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताता रहा है। हातमी के मामले में भी यही तर्क दिया गया है कि उसे इजरायल और अमेरिका द्वारा 'भटकाया' गया था। ईरान का मानना है कि ये देश आंतरिक अशांति फैलाकर तेहरान की सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं। फिलहाल, इन फांसियों के बाद ईरान के युवाओं में डर और गुस्से का मिला-जुला माहौल है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान की दंड प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।


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