
ईरान की इस तरकीब से इजराइल परेशान, 10 किमी तक फैलते हैं क्लस्टर बम
ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमलों में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। 300 मिसाइलों में करीब आधे क्लस्टर वॉरहेड थे, जिनसे छोटे बम नागरिक इलाकों में फैल रहे हैं।
ईरान ने इजरायल पर अपने मिसाइल हमलों में क्लस्टर बम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा दिया है। जून 2025 के 12 दिन के युद्ध में यह हथियार केवल कुछ मिसाइलों तक सीमित था, लेकिन मार्च 2026 के मौजूदा संघर्ष में इसका इस्तेमाल काफी बढ़ गया है।रिपोर्टों के मुताबिक ईरान अब तक इजरायल की ओर लगभग 300 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग चुका है। इनमें से करीब 50 प्रतिशत मिसाइलों में क्लस्टर वॉरहेड लगाए गए थे।
इजरायल की सेना (IDF) के अनुसार अब ईरान लगभग रोजाना क्लस्टर बम वाले वॉरहेड का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे नागरिक इलाकों में छोटे-छोटे विस्फोटक बम बिखर रहे हैं। मार्च 2026 में ऐसे हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं।
क्लस्टर बम क्या होते हैं?
क्लस्टर बम एक ऐसा हथियार होता है जो हवा में फटकर दर्जनों या सैकड़ों छोटे-छोटे बमों (सबमुनिशन्स) को एक बड़े इलाके में फैला देता है।ये छोटे बम जमीन पर गिरते ही विस्फोट करते हैं और व्यापक इलाके में भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी वजह से इन्हें वाइड-एरिया डिस्पर्सल वेपन्स भी कहा जाता है, क्योंकि एक ही हमले में कई लक्ष्यों को प्रभावित किया जा सकता है।
ईरान की मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले सबमुनिशन्स का वजन लगभग 2.5 किलोग्राम या उससे अधिक होता है। ये आकार में छोटे जरूर होते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में फैलने के कारण बेहद खतरनाक साबित होते हैं।
क्लस्टर बम कई प्रकार के हो सकते हैं—जैसे विस्फोटक, आग लगाने वाले या एंटी-टैंक। हालांकि ईरान की मिसाइलों में अधिकतर विस्फोटक प्रकार के सबमुनिशन्स इस्तेमाल किए गए हैं।दुनिया के 120 से अधिक देशों ने क्लस्टर बमों पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन ईरान और इजरायल दोनों इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं।
क्लस्टर बम कैसे काम करते हैं?
क्लस्टर बम आमतौर पर किसी मिसाइल या बड़े बम के भीतर पैक किए जाते हैं। जब मिसाइल अपने लक्ष्य के पास पहुंचती है तो उसका वॉरहेड हवा में आमतौर पर 7 से 10 किलोमीटर की ऊंचाई पर फट जाता है।इसके बाद दर्जनों छोटे बम बाहर निकलकर एक बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं और गुरुत्वाकर्षण के कारण जमीन पर गिरकर विस्फोट करते हैं।
ईरान की खोर्रमशहर-4, सेज्जिल-2, एमाद और गद्र जैसी मिसाइलों में क्लस्टर वॉरहेड लगाए जा सकते हैं। इनमें एक मिसाइल के अंदर 50 से 80 तक छोटे सबमुनिशन्स पैक किए जा सकते हैं, जो करीब 10 किलोमीटर तक के दायरे में फैल जाते हैं।
मिसाइल में लगे सेंसर या टाइमर तय ऊंचाई पर वॉरहेड को फटने का निर्देश देते हैं। इसके बाद छोटे बम बिना किसी नियंत्रण के बिखर जाते हैं हालांकि कई बार तकनीकी खराबी के कारण कुछ बम जमीन पर गिरने के बाद भी नहीं फटते। ऐसे बम लंबे समय तक खतरा बने रहते हैं और बाद में भी विस्फोट कर सकते हैं।
ईरान ने कब-कब किया इस्तेमाल?
19 जून 2025 को ईरान ने इजरायल पर करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से कम से कम एक में क्लस्टर वॉरहेड लगा था। यह मिसाइल गुश दान क्षेत्र के ऊपर फटी और करीब 20 छोटे बम 8 किलोमीटर के दायरे में फैल गए थे। उस हमले में 89 लोग घायल हुए थे।
अंतरराष्ट्रीय संगठन अमनेस्टी इंटरनेशनल ने उस समय आरोप लगाया था कि ईरान ने क्लस्टर मुनिशन्स का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन किया।
2026 में क्यों बढ़ा खतरा?
2026 के मौजूदा संघर्ष में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। ईरान अब तक 300 से अधिक मिसाइलें दाग चुका है और उनमें से लगभग आधी में क्लस्टर वॉरहेड लगाए गए थे।मार्च 2026 में हुए हमलों में एक व्यक्ति की मौत हुई, दो गंभीर रूप से घायल हुए और पहले हुए एक हमले में 12 लोग घायल हुए थे।
1 मार्च 2026 को सेंट्रल इजरायल में सबमुनिशन्स गिरे थे और 9 मार्च को हुए एक अन्य हमले में भी कई इलाकों में क्लस्टर बमों का असर देखा गया। इजरायल की होम फ्रंट कमांड ने चेतावनी दी है कि कई बम अभी भी नहीं फटे हैं और लोग उनसे दूर रहें।
क्लस्टर बम इतने विवादास्पद क्यों हैं?
क्लस्टर बमों को बेहद खतरनाक और विवादास्पद हथियार माना जाता है, क्योंकि ये सटीक निशाना नहीं लगाते और बड़े इलाके में अंधाधुंध फैल जाते हैं।इनसे घरों, सड़कों, अस्पतालों और अन्य नागरिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।सबसे बड़ा खतरा उन बमों से होता है जो गिरने के बाद भी नहीं फटते। ऐसे “डड्स” कई सालों तक जमीन में पड़े रहते हैं और बाद में नागरिकों के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय संगठन इनके इस्तेमाल की लगातार आलोचना करते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में क्लस्टर बम जैसे हथियार मानवीय संकट को और गहरा कर सकते हैं।

