
युद्ध के बीच ईरान में आंतरिक मतभेद! राष्ट्रपति और IRGC कमांडर आमने-सामने
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने IRGC के रवैये की आलोचना की। चेतावनी दी कि बिना सीजफायर 1 महीने में तबाह होगी अर्थव्यवस्था। 115% पहुंची महंगाई, ATM में कैश खत्म।
USA Iran War : अमेरिका और इजरायल के साथ एक महीने से जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष (Power Struggle) तेज हो गया है। 'ईरान इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के चीफ कमांडर अहमद वाहिदी के बीच युद्ध की रणनीति और बदहाल अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही युद्धविराम (Ceasefire) नहीं हुआ, तो ईरान की अर्थव्यवस्था अगले तीन हफ्तों से एक महीने के भीतर पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।
Serious disagreements have emerged between Iran's President Pezeshkian and IRGC chief Ahmad Vahidi over how to manage the war and its damaging impact on people’s livelihoods and the economy, sources with knowledge of the matter told Iran International.https://t.co/pF37In0qbl pic.twitter.com/FgGtsGiTuK
— Iran International English (@IranIntl_En) March 28, 2026
युद्ध बनाम अर्थव्यवस्था: सत्ता के दो केंद्रों में टकराव
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेश्कियान IRGC के उस अड़ियल रवैये की आलोचना कर रहे हैं, जिसके कारण पड़ोसी खाड़ी देशों पर लगातार हमले हो रहे हैं। राष्ट्रपति का मानना है कि इन हमलों से ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ रहा है और आर्थिक संकट गहरा रहा है। दूसरी ओर, IRGC कमांडर अहमद वाहिदी किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं और युद्ध को और लंबा खींचना चाहते हैं। पेजेश्कियान ने मांग की है कि सभी 'एग्जीक्यूटिव पावर' सरकार को सौंपी जाएं, जिसे वाहिदी ने सिरे से खारिज कर दिया है।
राष्ट्रपति की माफी और IRGC की मनमानी
ईरान सरकार और IRGC के बीच दरार तब और चौड़ी हो गई जब राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने 7 मार्च को एक वीडियो संदेश जारी कर खाड़ी देशों पर हुए हमलों के लिए माफी मांगी थी। उन्होंने इन हमलों को रोकने के स्पष्ट निर्देश दिए थे, लेकिन IRGC ने राष्ट्रपति के आदेशों को दरकिनार करते हुए हमले जारी रखे। IRGC ने उल्टा सरकार पर ही आरोप लगाया है कि युद्ध शुरू होने से पहले आर्थिक सुधारों को ठीक से लागू नहीं किया गया, जिससे आज देश इस हाल में पहुँचा है।
इजरायल की नजर ईरान की आंतरिक दरार पर
ईरानी शासन के भीतर बढ़ते इस तनाव पर इजरायल की भी पैनी नजर है। 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' ने एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के हवाले से बताया कि ईरानी शासन में दरार के साफ संकेत मिल रहे हैं। इजरायल इस स्थिति का फायदा उठाकर वहां के शासन को अस्थिर करने की तैयारी में है, हालांकि अधिकारी ने यह भी कहा कि अंतिम फैसला ईरानी जनता के हाथ में ही होगा।
कंगाली की कगार पर ईरान: 115% पहुंची महंगाई
ईरान की अर्थव्यवस्था युद्ध के बोझ तले दब चुकी है। फरवरी में युद्ध शुरू होने से पहले ही वहां महंगाई दर 115% के खतरनाक स्तर पर पहुँच गई थी। अब स्थिति यह है कि ईरान के कई शहरों में ATM में नकदी खत्म हो गई है और बैंकों की ऑनलाइन सेवाएं ठप हैं। सरकारी कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। ईरानी मुद्रा (Rial) की वैल्यू गिरने से आम जनता के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी नामुमकिन होता जा रहा है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका की घेराबंदी
इस आंतरिक कलह के बीच अमेरिका ने ईरान पर दबाव और बढ़ा दिया है। 3,500 अतिरिक्त अमेरिकी मरीन और घातक युद्धपोत USS त्रिपोली की तैनाती के साथ, यह पिछले 20 वर्षों में मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है। वाशिंगटन और यरुशलम की इस संयुक्त घेराबंदी ने तेहरान के सामने 'करो या मरो' वाली स्थिति पैदा कर दी है।

