ईरान युद्ध: IRGC की 18 अमेरिकी टेक और इंफ्रा कंपनियों को धमकी; अमेरिका बोला- पूरी तरह तैयार
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आईआरजीसी ने इन संगठनों को “युद्धोन्मादी अमेरिकी सरकार से जुड़े जासूसी संस्थान” बताया है। (फाइल फोटो)

ईरान युद्ध: IRGC की 18 अमेरिकी टेक और इंफ्रा कंपनियों को धमकी; अमेरिका बोला- पूरी तरह तैयार

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की सूची में अमेरिकी कंपनियों में एप्पल, गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एचपी, इंटेल, आईबीएम, सिस्को, टेस्ला, एनवीडिया, ओरेकल, जेपी मॉर्गन और बोइंग समेत अन्य शामिल हैं।


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इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की है कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियानों में कथित संलिप्तता के चलते 18 प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगी।

ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, आईआरजीसी ने आरोप लगाया है कि इन अमेरिकी कंपनियों ने “ईरान के भीतर अमेरिका-इजरायल के आतंकी अभियानों में जासूसी सेवाएं देकर सक्रिय मदद की है।”

आईआरजीसी ने मंगलवार (31 मार्च) को जारी बयान में टेक कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे जवाबी हमलों के लिए तैयार रहें। बयान में कहा गया कि “1 अप्रैल को ईरान के समयानुसार रात 8 बजे से शुरू होने वाले जवाबी हमले विनाशकारी होंगे।”

इसमें यह भी कहा गया कि जवाबी कार्रवाई में इन कंपनियों के क्षेत्रीय दफ्तरों को “पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।”

ईरान के निशाने पर अमेरिकी कंपनियां

आईआरजीसी द्वारा जारी सूची में एप्पल, गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं।

इसके अलावा, एचपी, इंटेल, आईबीएम और सिस्को जैसे महत्वपूर्ण हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता, साथ ही टेस्ला, एनवीडिया, ओरेकल, जेपी मॉर्गन और बोइंग जैसी वैश्विक कंपनियां भी उनके निशाने पर हैं।

प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरजीसी ने इन संगठनों को “अमेरिका की युद्धोन्मादी सरकार से जुड़े जासूसी संस्थान” करार दिया है।

आईआरजीसी ने आगे आरोप लगाया कि अमेरिकी कंपनियों की “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT) सेवाएं ईरान के अंदर अमेरिका और इजरायल द्वारा आतंकी अभियानों की योजना बनाने और हत्या के लक्ष्यों को ट्रैक करने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।”

आईआरजीसी की निकासी चेतावनी

बयान में कहा गया, “इस आतंकी अभियान के जवाब में, अब से आतंकवादी गतिविधियों में शामिल मुख्य संस्थानों को वैध लक्ष्य माना जाएगा।”

बल ने कर्मचारियों को संभावित लक्ष्यों से दूर रहने की चेतावनी भी दी।

“हम इन संस्थानों के कर्मचारियों को सलाह देते हैं कि वे अपनी जान बचाने के लिए तुरंत कार्यस्थल छोड़ दें। क्षेत्र के सभी देशों में इन कंपनियों के एक किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को भी स्थान खाली कर सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी जाती है,” आईआरजीसी ने कहा।

बढ़ता तनाव और जवाबी कार्रवाई के दावे

ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आए हैं जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है। प्रेस टीवी ने बताया कि फरवरी के अंत से कई वरिष्ठ ईरानी राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के साथ उनके परिवार के सदस्यों की भी मौत हो चुकी है, जिसे तेहरान “अमेरिका-इजरायल की लगातार आक्रामकता” बता रहा है।

ईरान ने बार-बार “इन हत्याओं का बदला लेने और हमलों में शामिल तत्वों को निशाना बनाने” की कसम खाई है, जिससे संकेत मिलता है कि अब निजी क्षेत्र की संस्थाएं भी दायरे में आ सकती हैं।

यह तीखी बयानबाजी तेहरान के इस दावे के बाद सामने आई है कि उसकी पिछली कूटनीतिक चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया। आईआरजीसी का कहना है कि वाशिंगटन और तेल अवीव में उसके सहयोगी, ईरान के विरोध के बावजूद “आतंकी अभियान” जारी रखे हुए हैं।

इसमें मंगलवार को किए गए एक कथित लक्षित हमले का भी जिक्र है, जिसमें कई ईरानी नागरिकों की मौत हुई बताई गई है।

अमेरिका ने कहा—सेना जवाब के लिए तैयार

वहीं, ट्रंप प्रशासन ने एप्पल और गूगल जैसी अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ धमकियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर रॉयटर्स से कहा, “अमेरिकी सेना ईरान के किसी भी हमले को रोकने के लिए तैयार है, जैसा कि इस बात से स्पष्ट है कि इस आतंकवादी शासन द्वारा किए जाने वाले बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में 90 प्रतिशत की कमी आई है।”

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