USA-Israel Vs Iran : ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि होने के बाद पूरी दुनिया में महायुद्ध का खतरा मंडराने लगा है। ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने रविवार को संकल्प लिया है कि वे अपने नेता के "हत्यारों" को कड़ी सजा देंगे। सरकारी टेलीविजन पर खामेनेई की मौत की खबर चलने के कुछ ही घंटों बाद IRGC ने एक बेहद आक्रामक बयान जारी किया। उन्होंने टेलीग्राम पर पोस्ट किया कि "इस्लामिक गणराज्य के इतिहास का सबसे भीषण सैन्य अभियान किसी भी क्षण शुरू हो सकता है।" इस जवाबी हमले का मुख्य निशाना क्षेत्र में मौजूद 'कब्जे वाले क्षेत्र' (इजरायल) और 'अमेरिकी आतंकवादी ठिकाने' होंगे। यह तनाव तब चरम पर पहुँचा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई को "इतिहास के सबसे दुष्ट व्यक्तियों में से एक" बताते हुए उनकी मौत की घोषणा की। अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान पर किए गए हमले अब दूसरे दिन भी जारी हैं। इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) करना बताया जा रहा है। 2003 के इराक युद्ध के बाद यह अमेरिका का किसी दूसरे देश की सरकार गिराने के लिए किया गया अब तक का सबसे बड़ा सैन्य हमला है।
खामेनेई के पूरे परिवार की मौत का दावा
ईरानी मीडिया के अनुसार, इस भीषण हमले में केवल 86 वर्षीय खामेनेई ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनकी बेटी, दामाद और पोती की भी हमले में जान चली गई है। इजरायली सेना के मुताबिक, खामेनेई के शीर्ष सलाहकार अली शामखानी और IRGC प्रमुख जनरल मोहम्मद पाकपुर भी मारे जा चुके हैं। सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी इस हमले में बच गए हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय 'अत्याचारियों' को सबक सिखाने की कसम खाई है।
मध्य पूर्व में बंद हुआ हवाई क्षेत्र
युद्ध के बढ़ते खतरों को देखते हुए ईरान, इराक, कुवैत, सीरिया, यूएई और इजरायल ने अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) को आंशिक रूप से बंद कर दिया है। दुनिया भर की प्रमुख एयरलाइंस ने मध्य पूर्व की अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। इजरायली सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर ने कहा कि यह ऑपरेशन जून में हुए 12 दिनों के युद्ध से कहीं बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यह हमला परमाणु समझौते के लिए नहीं, बल्कि पूरी सत्ता बदलने के लिए है।
ट्रंप और नेतन्याहू की ईरानी जनता से अपील
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ने ईरानी नागरिकों से इस मौके का फायदा उठाने की अपील की है। ट्रंप ने कहा कि यह ईरानी लोगों के लिए अपना देश वापस पाने का सबसे बड़ा अवसर है। उन्होंने ईरानी सुरक्षा बलों से पीछे हटने और शासन का साथ न देने का आग्रह किया। वहीं, नेतन्याहू ने ईरानियों को संदेश दिया कि यह शासन को उखाड़ फेंकने और अपना भविष्य सुरक्षित करने का सही समय है।
ईरान का पलटवार: खाड़ी देशों में तबाही
ईरान ने इन हमलों का जवाब मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार से दिया है। अबू धाबी में हुए धमाकों में दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि तेल अवीव में भी एक व्यक्ति की जान गई है। खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी अब ईरान के निशाने पर हैं। तेहरान में सुबह से ही धमाकों की आवाजें सुनी जा रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि यह किसी भी समय एक पूर्ण विकसित वैश्विक युद्ध का रूप ले सकती है।