
ईरान-इजरायल युद्ध: सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा भारी विनाश, कई बेस तबाह
Vantor और Planet Labs की सैटेलाइट तस्वीरों ने ईरान के मिसाइल बेस, नौसैनिक ठिकानों और ड्रोन सेंटरों पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों की भीषण तबाही को उजागर किया है।
USA-Israel Vs Iran : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच नई हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। ये तस्वीरें ईरान में अमेरिकी और इजरायली सेनाओं द्वारा चलाए जा रहे व्यापक सैन्य अभियान की स्पष्ट झलक पेश करती हैं। 'वैनटोर' और 'प्लैनेट लैब्स' द्वारा जारी इन विजुअल्स में रणनीतिक ठिकानों पर हुए नुकसान को साफ देखा जा सकता है। इसमें ईरानी मिसाइल बेस, नौसैनिक प्रतिष्ठान, ड्रोन सुविधाएं और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
सैटेलाइट इंटेलिजेंस फर्मों ने 21 फरवरी और 4 मार्च 2026 की तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों की तुलना मई 2024 की पुरानी तस्वीरों से की गई है। यह डेटा दर्शाता है कि एयर कैंपेन ने ईरान के एक बड़े भौगोलिक हिस्से को प्रभावित किया है। हमले इतने सटीक थे कि कई सैन्य ठिकाने अब पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं। इस हवाई हमले ने ईरान की सैन्य क्षमता को गहरी चोट पहुंचाई है।
मिसाइल और नौसैनिक अड्डों पर सटीक प्रहार
पश्चिमी ईरान में केरमानशाह के पास स्थित प्रमुख मिसाइल सुविधा पर भारी क्षति देखी गई है। हालिया तस्वीरों में बेस के भीतर कई इमारतों को संरचनात्मक रूप से क्षतिग्रस्त दिखाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि तबाही का यह पैटर्न सीधे हवाई बमबारी का परिणाम है। केरमानशाह क्षेत्र लंबे समय से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल बुनियादी ढांचे का केंद्र रहा है। यहाँ कई महत्वपूर्ण इमारतें या तो ढह गई हैं या गंभीर रूप से टूट चुकी हैं।
दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित कोनारक नौसैनिक अड्डे पर भी बड़े हमले हुए हैं। ओमान की खाड़ी के पास स्थित यह बेस ईरानी नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सैटेलाइट इमेजरी में यहाँ के इंस्टॉलेशन के कई हिस्सों में ढांचागत नुकसान दर्ज किया गया है। इसके अलावा तेहरान के पश्चिम में स्थित गरमदराह मिसाइल बेस पर भी सीधे प्रहार किए गए हैं। यहाँ मिसाइल संचालन से जुड़ी संरचनाओं पर सीधे प्रभाव के निशान दिखाई दे रहे हैं।
ड्रोन क्षमता और एयरबेस को बनाया निशाना
ईरान के ड्रोन स्टोरेज सुविधा और एयरस्ट्रिप को भी निशाना बनाया गया है। तस्वीरों में एयरस्ट्रिप पर बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। यह रणनीति स्पष्ट रूप से विमानों और ड्रोनों के संचालन को रोकने के लिए अपनाई गई है। ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन तकनीक में भारी निवेश किया है। इन हमलों से उसकी मानवरहित प्रणालियों की क्षमता पर बुरा असर पड़ने की संभावना है।
कोनारक एयरपोर्ट और एयरबेस पर मौजूद 'हार्डन्ड एयरक्राफ्ट शेल्टर' भी सुरक्षित नहीं रहे। ये मजबूत संरचनाएं विमानों को हमलों से बचाने के लिए बनाई जाती हैं। हालांकि, सैटेलाइट डेटा दिखाता है कि इन शेल्टरों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा एयरपोर्ट से जुड़े अन्य बुनियादी ढांचे भी इस हमले की चपेट में आए हैं। यह पूरे क्षेत्र में ईरान की हवाई ताकत को कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश लगती है।
ईरान का पलटवार और क्षेत्रीय तनाव
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी जवाबी कार्रवाई में इजरायल पर हमले किए हैं। गुरुवार तड़के इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट और पास के एयरबेस को निशाना बनाया गया। ईरान ने दावा किया कि उसने एक टन वजनी वारहेड वाली मिसाइलें दागी हैं। यरूशलेम में हवाई हमले के सायरन और धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। इजरायली अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अलर्ट ईरान से दागी गई मिसाइलों के कारण सक्रिय हुआ था।
युद्ध की यह आग अब पड़ोसी देशों तक भी फैल चुकी है। बहरीन की राजधानी मनामा में एक आवासीय हाई-राइज बिल्डिंग पर ड्रोन हमला हुआ है। यूएई की राजधानी अबू धाबी में भी ड्रोन के मलबे से छह लोग घायल हुए हैं। सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने तीन क्रूज मिसाइलों और कई ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। वहीं कुवैत में एक अमेरिकी ठिकाने पर भी नौसैनिक ड्रोन से हमले की खबर है।
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