
जूनियर खामेनेई का चयन क्या ईरान की युद्ध नीति का कोई संकेत है?, मोजतबा का IRGC से पुराना नाता
मोजतबा को उत्तराधिकारी बनाए जाने का फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद शुरू हुआ युद्ध अब एक नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया है।
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया है। ईरानी सरकारी टीवी ने सोमवार तड़के इसकी घोषणा की। यानी मोजतबा खामेनेई अब ईरान के नए सुप्रीम लीडर होंगे। 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर होंगे। उनसे पहले यह पद आयतुल्ला रुहोल्ला खोमैनी (1979–1989) और आयतुल्ला अली खामेनेई (1989–2026) के पास था।
उनको उत्तराधिकारी बनाए जाने का फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद शुरू हुआ युद्ध अब एक नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया है। मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से इस पद का संभावित दावेदार माना जा रहा था। लेकिन मोजतबा ने इससे पहले कभी भी किसी सरकारी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ा और न ही उन्हें किसी पद पर नियुक्त किया गया था।
अब सवाल यह है कि मोजतबा खामेनेई के बारे में क्या जाना जाता है और उनका चयन ईरान की युद्ध रणनीति के बारे में क्या बताता है? इसे समझने से पहले मोजतबा और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) जैसी शक्तिशाली सैन्य संस्था के बीच के संबंंध को समझना जरूरी है।
मोजतबा और IRGC
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था काफी जटिल है। वहां एक राष्ट्रपति होता है जिसके पास कुछ अधिकार होते हैं, लेकिन इसके साथ ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) जैसी शक्तिशाली सैन्य संस्था भी होती है। इस पूरी संरचना के शीर्ष पर सुप्रीम लीडर होता है।
मोजतबा ने कभी कोई औपचारिक राजनीतिक पद नहीं संभाला है और वे कोई वरिष्ठ धार्मिक नेता भी नहीं हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि उनकी नियुक्ति के पीछे मुख्य कारण उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, IRGC से संबंध और वर्तमान युद्ध की स्थिति है। इस समय जो युद्ध चल रहा है, IRGC इसकी अगुवाई कर रही है इसलिए मोजतबा का चयन और भी अहम हो जाता है।
जानकारों के मुताबिक IRGC के साथ मोजतबा खामेनेई के संबंध ईरान-इराक युद्ध के समय से जुड़े हैं। उस दौरान मोजतबा खामेनेई हबीब इब्न मजाहिर बटालियन में शामिल थे, जो एक स्वयंसेवी समूह था और बाद में ईरान की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन गया।”
कहा जाता है कि उस वक़्त उनके साथ लड़ने वाले कई सैनिक बाद में IRGC और खुफिया एजेंसियों में वरिष्ठ पदों पर पहुंचे। युद्ध के समय बने ये रिश्ते ईरान की सबसे शक्तिशाली संस्थाओं में मोजतबा की स्थिति मजबूत करने में अहम साबित हुए।
हालांकि अमेरिका और इजरायल को मोजतबा खामेनेई भी बर्दाश्त नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले आयतुल्ला खामेनेई के बेटे को कमज़ोर और अमेरिका के लिए अस्वीकार्य बताया था। इजरायल भी धमकी दे चुका है कि खामेनेई के उत्तराधिकारी का भी वैसा ही हश्र होगा। लेकिन जूनियर खामेनेई की नियुक्ति से ईरान ने संकेत दे दिए हैं कि इस जंग में उसका रुख क्या रहने वाला है।

