USA/Israel Vs Iran : मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस बीच शनिवार को ईरान के सबसे महत्वपूर्ण नतांज़ परमाणु संवर्धन केंद्र पर बड़ा हवाई हमला किया गया। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी मिजान ने इस हमले की पुष्टि की है। हालांकि रिपोर्ट में राहत की बात यह कही गई है कि इस हमले के बाद वहां किसी भी तरह का रेडियोधर्मी रिसाव (रेडिएशन लीकेज) दर्ज नहीं किया गया है। नतांज़ संयंत्र तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह वही स्थान है जिसे पिछले साल जून में भी निशाना बनाया गया था। इस ताजा हमले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है क्योंकि यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक एक दिन बाद हुआ है जिसमें उन्होंने सैन्य अभियान को कम करने की बात कही थी। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
परमाणु केंद्र को कितना हुआ नुकसान?
नतांज़ ईरान का मुख्य परमाणु संवर्धन स्थल माना जाता है। युद्ध के पहले सप्ताह में भी यहाँ हमले हुए थे। उस समय सैटेलाइट तस्वीरों में कई इमारतों को क्षतिग्रस्त देखा गया था। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इन हमलों से फिलहाल किसी रेडियोधर्मी परिणाम की आशंका नहीं है। शनिवार को हुए ताज़ा हमले के बाद ईरानी मीडिया ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है।
ट्रंप के विरोधाभासी बयान और सैन्य रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि वे सैन्य अभियानों को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के करीब है। हालांकि उनके दावों के विपरीत अमेरिका क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ा रहा है। अमेरिका ने तीन और उभयचर हमलावर जहाज और लगभग 2,500 अतिरिक्त नौसैनिक इस क्षेत्र में भेजे हैं। इसके अलावा कांग्रेस से युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि भी मांगी गई है।
तेल की कीमतों में उछाल और प्रतिबंधों में ढील
युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है। युद्ध शुरू होने से पहले यह कीमत 70 डॉलर के आसपास थी। बाजार को संभालने के लिए ट्रंप प्रशासन ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने की घोषणा की है। यह छूट केवल उन जहाजों के लिए है जिन पर शुक्रवार तक तेल लोड हो चुका था। यह कदम बढ़ती ईंधन कीमतों को रोकने की एक कोशिश माना जा रहा है।
क्षेत्रीय संघर्ष और मानवीय क्षति
इजरायली सेना ने शनिवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। मध्य बेरूत में धुएं के गुबार और बड़े धमाके सुने गए। लेबनान सरकार के अनुसार इजरायली हमलों में अब तक 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ईरान में इस युद्ध के दौरान अब तक 1,300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं इजरायल में ईरानी मिसाइलों से 15 लोगों की मौत हुई है।
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