खामेनेई की मौत के बाद ईरान में कौन होगा अगला सुप्रीम लीडर? IRGC का बड़ा दांव
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खामेनेई की मौत के बाद ईरान में कौन होगा अगला सुप्रीम लीडर? IRGC का बड़ा दांव

खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सत्ता संघर्ष शुरू हो गया है। IRGC जल्द से जल्द नए उत्तराधिकारी के नाम पर मुहर लगाना चाहती है। पढ़ें पूरी राजनीतिक उथल-पुथल।


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US Iran War : ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश में भीषण राजनीतिक और सैन्य संकट पैदा हो गया है। ईरान इंटरनेशनल की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) सत्ता पर नियंत्रण पाने की कोशिश में जुटी है। सैन्य बल चाहता है कि कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर जल्द से जल्द नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति की जाए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि IRGC का शीर्ष कमांड रविवार, 1 मार्च की सुबह तक ही उत्तराधिकारी के नाम का फैसला कर लेना चाहता है। वर्तमान में अमेरिका और इजरायल के हमलों के कारण ईरान के हालात बेहद अस्थिर बने हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि संवैधानिक संस्था ‘विशेषज्ञों की परिषद’ (Assembly of Experts) की बैठक बुलाना फिलहाल मुमकिन नहीं दिख रहा है। संवैधानिक रूप से 88 वरिष्ठ धार्मिक विद्वानों वाली यह परिषद ही नए नेता का चुनाव करती है। लेकिन युद्ध जैसी स्थिति और सुरक्षा कारणों से पूरी प्रक्रिया अब सैन्य हाथों में जाती दिख रही है। खामेनेई ने अपने जीवनकाल में किसी उत्तराधिकारी का नाम तय नहीं किया था, जिससे संकट और गहरा गया है।


सैन्य ढांचे में बढ़ा भारी भ्रम और डर
खामेनेई की मौत के बाद ईरान के सुरक्षा और सैन्य ढांचे में भारी अव्यवस्था फैल गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कमांड चेन के कई हिस्से टूट चुके हैं और आदेशों का आदान-प्रदान सही से नहीं हो पा रहा है। कई सैन्य कमांडर और जवान अपने ठिकानों पर रिपोर्ट करने से भी डर रहे हैं। उन्हें अंदेशा है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों का अगला निशाना सैन्य केंद्र ही होंगे। इस डर की वजह से फील्ड स्तर पर फैसले लेने में भारी परेशानी हो रही है।

विरोध प्रदर्शनों की नई लहर का खतरा
IRGC को डर है कि रविवार का दिन चढ़ते ही लोग सड़कों पर उतर सकते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार विरोधी नई लहर शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस स्थिति को संभालने के लिए तनाव में हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, फिलहाल ईरान में ऐसा कोई नेता नहीं है जिसकी धार्मिक और राजनीतिक पकड़ खामेनेई जैसी मजबूत हो। नए नेता के लिए धार्मिक संस्थानों पर नियंत्रण पाना सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।

कौन होता है सुप्रीम लीडर का दावेदार?
ईरान के 'विलायत-ए-फकीह' सिद्धांत के तहत केवल एक बड़ा धार्मिक विद्वान ही इस पद पर बैठ सकता है। उत्तराधिकार की यह प्रक्रिया हमेशा से जटिल रही है लेकिन अब यह पूरी तरह अनिश्चित हो गई है। IRGC चाहती है कि कोई ऐसा व्यक्ति सामने आए जो सेना के हितों की रक्षा कर सके। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें तेहरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। सत्ता का यह संक्रमण ईरान के भविष्य की दिशा तय करेगा।


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