ईरान का दर्द: 168 बच्चों की मौत, राष्ट्रपति की PM मोदी से शांति की गुहार
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ईरान का दर्द: 168 बच्चों की मौत, राष्ट्रपति की PM मोदी से शांति की गुहार

ईरानी राष्ट्रपति ने PM मोदी को फोन कर बयां किया मीनाब स्कूल हमले का मंजर। 168 मासूमों की शहादत और नतांज पर बमबारी। क्या ब्रिक्स के जरिए भारत बनेगा शांति दूत ?


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PM Modi Talks With President Pezeshkian : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी भीषण जंग के बीच शनिवार को राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर मदद की गुहार लगाई। राष्ट्रपति ने रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा करते हुए बताया कि अमेरिकी हमलों में ईरान के मीनाब स्थित एक स्कूल के 168 मासूम बच्चे शहीद हो गए हैं। नतांज़ परमाणु केंद्र पर हुई ताजा बमबारी और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने से आहत ईरान ने भारत से इस 'अमानवीय' युद्ध को रुकवाने के लिए ब्रिक्स (BRICS) के जरिए हस्तक्षेप की अपील की है। वहीं, पीएम मोदी ने 168 बच्चों की मौत और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए साफ किया कि युद्ध किसी के हित में नहीं है और भारत वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।



मीनाब का कत्लेआम और राष्ट्रपति का दर्द
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने हमलों की भयावह तस्वीर से अवगत करवाया। मीनाब के स्कूल पर सीधा हमला हुआ था। मलबे के नीचे 168 मासूमों की जान गई। राष्ट्रपति ने कहा कि यह नरसंहार असहनीय है। ईरान ने कभी यह युद्ध शुरू नहीं किया। अमेरिका और इजरायल ने अमानवीयता की हदें पार कीं। बेगुनाह नागरिक और बच्चे अब निशाने पर हैं। निहत्थे लोगों पर यह हमला युद्ध अपराध है।

परमाणु वार्ता के बीच 'पीठ पर खंजर'
ईरान परमाणु वार्ता की मेज पर बैठा था। उसी वक्त नतंज परमाणु केंद्र को निशाना बनाया गया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह विश्वासघात जैसा है। उन्होंने परमाणु हथियारों के अमेरिकी दावों को नकारा। सर्वोच्च नेता ने इसके खिलाफ फतवा जारी किया है। परमाणु हथियार बनाना हमारे लिए धर्म के खिलाफ है। पश्चिमी देश केवल युद्ध का बहाना ढूंढ रहे हैं। असल में इजरायल ही क्षेत्र में आग लगा रहा है।

नतांज पर ताजा प्रहार और रेडियोधर्मी डर
शनिवार सुबह नतंज संवर्धन केंद्र पर फिर बमबारी हुई। अमेरिकी और इजरायली विमानों ने भारी तबाही मचाई। ईरानी मीडिया ने इसे 'अंधाधुंध हमला' करार दिया। हालांकि, अभी रेडियोधर्मी रिसाव का कोई खतरा नहीं है। लेकिन स्थानीय निवासियों में भारी दहशत का माहौल है। ईरान इसे अपने अस्तित्व पर सीधा हमला मानता है। सुरक्षा एजेंसियां अब हाई अलर्ट पर तैनात हैं।

PM मोदी का कूटनीतिक 'सुरक्षा कवच'
प्रधानमंत्री मोदी ने शांति का रास्ता चुनने को कहा। उन्होंने ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया। मोदी ने कहा कि यह ग्लोबल सप्लाई चेन का संकट है। होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। भारत ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों की चिंता जताई। पीएम ने साफ किया कि युद्ध से किसी का भला नहीं होगा। बातचीत ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।

ब्रिक्स (BRICS) और भारत की निर्णायक भूमिका
ईरान ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता से उम्मीदें जताईं। पेजेश्कियान ने ब्रिक्स को 'शांति का दूत' बनने को कहा। उन्होंने एक नया क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा प्रस्तावित किया है। इसमें बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। ईरान चाहता है कि भारत इस आवाज को बुलंद करे। पूरी दुनिया अब भारत के अगले कदम का इंतजार कर रही है।


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