होर्मुज संकट: ईरान ने भारत से कहा चिंता न करो दोस्त
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होर्मुज संकट: ईरान ने भारत से कहा 'चिंता न करो दोस्त'

मिडिल ईस्ट जंग के 34वें दिन ईरान का बड़ा बयान। भारत, चीन और रूस जैसे मित्र देशों को रास्ते में छूट। 18 भारतीय जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे।


Israel/USA Vs Iran : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा तेहरान पर किए गए हमलों के बाद से इस रणनीतिक जलमार्ग में यातायात लगभग ठप है। युद्ध के 34वें दिन ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक संदेश देते हुए भारत को आश्वस्त किया है कि उसे चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारत जैसे "मित्र देशों" के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने में कोई बाधा नहीं आएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और अमेरिका बल प्रयोग की बात कर रहा है।


'मित्र देशों' के लिए खुला रहेगा होर्मुज का रास्ता
ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भारत के लिए एक विशेष संदेश साझा किया है। दूतावास ने लिखा, "हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं है।" ईरान ने उन दो दर्जन वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए हैं जो उसके दुश्मनों से जुड़े थे। लेकिन चीन, रूस, पाकिस्तान, इराक और भारत जैसे देशों के लिए ईरान ने अपना रुख नरम रखा है। अब तक कम से कम आठ भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस जलडमरूमध्य से बाहर निकल चुके हैं। हालांकि अभी भी 18 भारतीय झंडे वाले जहाज और 485 भारतीय नाविक पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।

भारत सरकार की सतर्कता और बैकअप प्लान
भारत का पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। मंगलवार को जारी एक बयान में मंत्रालय ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बावजूद देश में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी (LPG) की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। डीजी शिपिंग, जहाज मालिकों और भारतीय मिशनों के साथ तालमेल बिठाकर फंसे हुए 18 जहाजों की सुरक्षा की निगरानी कर रहा है। भारत के लिए यह मार्ग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है।

ट्रंप का कड़ा संदेश और युद्ध की विभीषिका
एक तरफ ईरान नरमी दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में आक्रामक रुख अपनाया है। ट्रंप ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि इस जलमार्ग को बलपूर्वक खोला जा सकता है। उन्होंने तेल के लिए होर्मुज पर निर्भर देशों को उकसाते हुए कहा कि वे "थोड़ी हिम्मत जुटाएं" और खुद जाकर रास्ता साफ करें। इस युद्ध में अब तक जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। ईरान में 1,900 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि लेबनान में 1,200 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराता खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'चोक पॉइंट' माना जाता है। यहाँ से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। यदि यह मार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इजराइल द्वारा लेबनान में जमीनी आक्रमण और हिजबुल्लाह के साथ जारी जंग ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपने रणनीतिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाए रखता है। फिलहाल ईरान के भरोसे ने भारतीय खेमे को थोड़ी राहत जरूर दी है।

(एजेंसी इनपुट के साथ )


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