ट्रंप के शांति प्रस्ताव को ईरान ने बताया हार, कहा- यह केवल डर है
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ट्रंप के शांति प्रस्ताव को ईरान ने बताया 'हार', कहा- यह केवल डर है

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हमलों को 5 दिन टालने के फैसले पर ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी मीडिया ने इसे अमेरिकी 'पीछे हटना' और अपनी सैन्य ताकत की जीत करार दिया है।


Iran's Media Reaction On Trump's Announcemnet :

पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र से एक तरफ जहाँ शांति की उम्मीदें जगी थीं, वहीं दूसरी ओर ईरान के आधिकारिक रुख ने तनाव को फिर से बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी पावर ग्रिड पर हमलों को 5 दिनों के लिए स्थगित करने के फैसले को तेहरान के सरकारी मीडिया ने 'अमेरिका की हिचकिचाहट' और 'हार' करार दिया है। जहाँ ट्रंप ने इसे 'उत्पादक बातचीत' का परिणाम बताया, वहीं ईरान के 'प्रेस टीवी' और 'मेहर न्यूज' जैसे प्रमुख संस्थानों ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी कोई बातचीत नहीं हो रही है। ईरान का दावा है कि उसकी सैन्य धमकियों और वैश्विक स्तर पर बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण ट्रंप को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। तेहरान ने इसे कूटनीति नहीं, बल्कि अपनी 'प्रतिरोध की नीति' (Deterrence) की बड़ी जीत बताया है।


ईरानी मीडिया का हमला: 'ट्रंप का पीछे हटना एक दिखावा'
ईरान के सरकारी प्रसारक 'प्रेस टीवी' ने एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट दी है कि ट्रंप ने बातचीत का प्रस्ताव केवल इसलिए दिया क्योंकि ईरान की सैन्य धमकियाँ विश्वसनीय थीं। अधिकारी ने कहा कि 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' से न तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा और न ही ऊर्जा बाजार स्थिर होंगे। 'तेहरान टाइम्स' ने ट्रंप की रणनीति को 'कूटनीति के भेष में पीछे हटना' बताते हुए उन पर निशाना साधा है। वहीं, 'मेهر न्यूज' ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऊर्जा केंद्रों पर हमलों की धमकी महज एक 'ब्लफ' (दिखावा) थी, जिसे ईरान के कड़े जवाब ने बेनकाब कर दिया है।

युद्ध के मैदान में डटा है ईरान
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा, "ट्रंप और अमेरिका एक बार फिर पीछे हट गए हैं। मैदान में अभी भी हमारा पलड़ा भारी है। यह शैतान की एक और हार है।" ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने भी इस शांति के दावे को खारिज करते हुए इसे ईरान की उन धमकियों का असर बताया है, जिसमें इजरायल के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की बात कही गई थी। ईरान का संदेश साफ है—वह झुकने के बजाय अपनी सैन्य ताकत के दम पर अमेरिका को चुनौती देता रहेगा।

5 दिन का अल्टीमेटम या नई जंग की तैयारी?
ईरान के सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का 5 दिन का समय देना किसी ठोस बातचीत के लिए बहुत कम है। उनका तर्क है कि यह समय केवल नई सैन्य रणनीति तैयार करने या वैश्विक दबाव को कम करने के लिए लिया गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि बिजली संयंत्रों पर हमला हुआ, तो वे पूर्ण पैमाने पर रक्षात्मक और आक्रामक कार्रवाई करेंगे। तेहरान ने साफ कर दिया है कि ऊर्जा ग्रिड अभी भी एक युद्धक्षेत्र बना रहेगा और वे किसी भी समझौते के बजाय 'बराबरी के मुकाबले' (Mutual Escalation) पर विश्वास करते हैं।

वैश्विक बाजार पर असर
ईरान के इस अड़ियल रुख ने उन निवेशकों को फिर से चिंता में डाल दिया है, जिन्हें ट्रंप के बयान के बाद राहत की उम्मीद थी। अगर ईरान बातचीत की मेज पर आने से इनकार करता है, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और गहरा सकता है। तेल की कीमतों में जो मामूली गिरावट आई थी, वह फिर से उछाल में बदल सकती है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी पेचीदा हो गई है, क्योंकि शांति की कूटनीतिक कोशिशें फिलहाल विफल होती दिख रही हैं।


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