Hormuz Crisis: क्या ईरान की चेतावनी में छिपा है भारत के लिए राहत का रास्ता?
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Hormuz Crisis: क्या ईरान की चेतावनी में छिपा है भारत के लिए राहत का रास्ता?

IRGC ने केवल पश्चिमी देशों के लिए बंद किया होर्मुज जलमार्ग। भारत की तटस्थता और रूस से नजदीकी बन सकती है ढाल। क्या बिना रुकावट आता रहेगा भारत का कच्चा तेल?


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Strait Of Hormuz And Oil Crisis: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी गई ताजा चेतावनी ने पूरी दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। जहां एक तरफ अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देशों के लिए यह मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ भारत जैसे 'तटस्थ' देशों के लिए इसमें राहत की एक बड़ी उम्मीद दिखाई दे रही है। IRGC ने स्पष्ट रूप से कहा है कि निशाना केवल वे जहाज होंगे जो अमेरिका या उसके पश्चिमी सहयोगियों के समर्थक हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सधी हुई कूटनीति और हाल ही में अयातुल्ला खामेनेई की मौत पर जताया गया आधिकारिक शोक, तेहरान के साथ रिश्तों को नई मजबूती दे सकता है। ईरान ने पहले ही चीन के जहाजों को छूट देने का एलान किया है, और अब ऐसी संभावना है कि भारत को भी इस 'सेफ पैसेज' का हिस्सा बनाया जाए। अगर ऐसा होता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत एकमात्र ऐसा प्रमुख देश होगा जिसका व्यापारिक मार्ग सुरक्षित बना रहेगा। यह न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते कद को भी रेखांकित करेगा।


पश्चिमी देशों पर पाबंदी, भारत के लिए खुला रास्ता?
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के अनुसार, IRGC की चेतावनी का दायरा बहुत स्पष्ट है। उन्होंने केवल उन जहाजों को 'हिट' करने की बात कही है जो अमेरिका, इजरायल या यूरोप के झंडे तले चल रहे हैं। भारत ने इस युद्ध में अब तक किसी भी पक्ष का सैन्य समर्थन नहीं किया है, जिससे भारत की छवि एक 'न्यूट्रल' देश की बनी हुई है। चूंकि ईरान और भारत के संबंध ऐतिहासिक रूप से बेहतर रहे हैं, इसलिए भारतीय मालवाहक जहाजों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा जा सकता है। यह स्थिति भारत के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं होगी।

चीन के बाद क्या भारत को मिलेगा 'ग्रीन सिग्नल'?
ईरान ने चीन के प्रति आभार जताते हुए उनके जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि भारत भी इसी श्रेणी में शामिल हो सकता है। भारत न केवल ईरान से कूटनीतिक संवाद बनाए हुए है, बल्कि वह रूस का भी सबसे बड़ा तेल खरीदार है—जो ईरान का करीबी सहयोगी है। रूस-चीन-ईरान के इस त्रिकोणीय समीकरण में भारत की मौजूदगी उसे एक सुरक्षित गलियारा (Safe Corridor) दिला सकती है, जिससे खाड़ी से आने वाले तेल और गैस की सप्लाई चेन टूटने से बच जाएगी।

रूसी तेल और भारतीय रिफाइनरीज को मजबूती
होर्मुज संकट के बीच भारत का रूस की ओर वापस मुड़ना एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो रहा है। 14 लाख बैरल रूसी तेल के साथ भारतीय बंदरगाहों की ओर आ रहे तीन टैंकरों ने साबित कर दिया है कि भारत ने अपनी वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली है। यदि ईरान होर्मुज में भारतीय जहाजों को सुरक्षा का आश्वासन देता है, तो भारत न केवल रूस से बल्कि खाड़ी के अन्य देशों से भी अपना आयात जारी रख पाएगा। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद जगी है।

बाजार में लौटे भरोसे की असली वजह
शेयर बाजार में गुरुवार को आई 900 अंकों की उछाल इसी कूटनीतिक उम्मीद का परिणाम मानी जा रही है। निवेशकों को यह संकेत मिल रहा है कि भारत इस युद्ध की आग से खुद को बचाने में सफल रहेगा। 'इंडिया विक्स' का गिरना यह दर्शाता है कि बाजार अब इस बात को लेकर आश्वस्त है कि भारत की ऊर्जा सप्लाई लाइन पूरी तरह नहीं कटेगी। गॉल में घायल ईरानी नाविकों की मदद और नई दिल्ली में भारत का संवेदना जताना, ये वो कड़ियाँ हैं जो ईरान के साथ भारत के व्यापारिक हितों की रक्षा कर सकती हैं।


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