खामेनेई की मौत के बाद ईरान की सत्ता पर कौन होगा काबिज ?
x

खामेनेई की मौत के बाद ईरान की सत्ता पर कौन होगा काबिज ?

खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सत्ता के लिए संघर्ष शुरू हो गया है। एक तरफ विपक्षी नेता मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ ट्रंप ने 'पसंदीदा' उम्मीदवार की बात कही है।


Click the Play button to hear this message in audio format

Khamenei Dead : ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद देश का भविष्य अधर में लटक गया है। तेहरान ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में खामेनेई मारे गए हैं। इस खबर के बाद से ही ईरान में सत्ता हथियाने की होड़ और राजनीतिक उथल-पुथल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके पास ईरान के नए नेतृत्व के लिए 'कुछ अच्छे उम्मीदवार' हैं। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह जानते हैं कि अगला नेता कौन होना चाहिए, लेकिन नाम अभी गुप्त रखेंगे। वर्तमान में ईरान के संविधान के अनुसार एक अंतरिम 'नेतृत्व परिषद' का गठन किया गया है। इसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और न्यायपालिका प्रमुख जी.एम. एजेई शामिल हैं। यह परिषद नए सर्वोच्च नेता के चुने जाने तक देश का कामकाज संभालेगी। हालांकि, विपक्षी गुटों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के बीच पर्दे के पीछे भारी खींचतान चल रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि नेतृत्व की कमी का फायदा उठाकर IRGC सत्ता पर कब्जा कर सकता है।


विपक्ष के दो दिग्गजों के अलग-अलग विजन
ईरान के दो प्रमुख विपक्षी नेता मरियम राजवी और निर्वासित शहजादे रजा पहलवी ने ईरानी जनता से एकजुट होने की अपील की है। पेरिस स्थित एनसीआरआई (NCRI) की नेता राजवी ने 'लोकतांत्रिक गणराज्य' बनाने और मुल्लाओं के शासन को खत्म करने का आह्वान किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान के लोग न तो शाह की राजशाही चाहते हैं और न ही मौलवियों का शासन। दूसरी तरफ, अंतिम सम्राट के बेटे रजा पहलवी ने अमेरिकी हमले को 'मानवीय हस्तक्षेप' बताया है। उन्होंने कहा कि अब सड़कों पर उतरकर अंतिम लड़ाई लड़ने का समय आ गया है। दोनों नेताओं ने सेना से हथियार डालने और जनता का साथ देने की अपील की है।

उत्तराधिकार की दौड़ में मुजतबा और हसन के नाम
खामेनेई ने अपने जीवनकाल में किसी उत्तराधिकारी का नाम तय नहीं किया था। हालांकि, उनके दूसरे बेटे 56 वर्षीय मुजतबा खामेनेई को सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है। मुजतबा अपने पिता की तरह ही कट्टरपंथी नीतियों के समर्थक हैं और सेना पर उनकी पकड़ मजबूत है। उनके मुकाबले में क्रांति के जनक रूहुल्लाह खुमैनी के पोते, 53 वर्षीय हसन खुमैनी का नाम भी चर्चा में है। हसन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उदारवादी और सुलह करने वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है।

कैसे चुना जाएगा अगला 'सुप्रीम लीडर'?
ईरान के कानून के मुताबिक, अब 88 सदस्यीय 'विशेषज्ञों की परिषद' (Assembly of Experts) को नया नेता चुनना होगा। यह परिषद पूरी तरह से शिया मौलवियों से बनी होती है। ये सदस्य हर आठ साल में जनता द्वारा चुने जाते हैं, लेकिन उनकी उम्मीदवारी की जांच 'गार्जियन काउंसिल' करती है। उत्तराधिकार की यह प्रक्रिया गुप्त तरीके से होती है, जिससे कयास लगाना कठिन हो जाता है। 1979 की क्रांति के बाद ईरान में यह सत्ता हस्तांतरण का केवल दूसरा मौका है।


Read More
Next Story