धन्यवाद भारत तेहरान ने भारतीयों के लिए क्यों खोला दिल, जताया आभार
x
ईरान ने एक बार फिर भारत और भारतीय जनता के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त किया है।

'धन्यवाद भारत' तेहरान ने भारतीयों के लिए क्यों खोला दिल, जताया आभार

इस्लामाबाद में अमेरिका से चल रही शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बीच, ईरान ने फिर भारत और भारतीय जनता के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त किया...


Click the Play button to hear this message in audio format

नई दिल्ली में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि, अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारतीय लोगों का आभार जताते हुए एक बड़ा बयान दिया है। तेहरान की ओर से यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थितियों और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उपजे तनावपूर्ण माहौल में भारतीयों ने अपना समर्थन दिखाया। यह आभार प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है, जब पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता अविश्वास और कूटनीतिक गतिरोध की भेंट चढ़ गई है। ईरान का मानना है कि यह वार्ता अनुकूल माहौल में नहीं हो सकी, लेकिन इस बीच भारत के साथ उसके संबंध एक अलग मजबूती दर्शा रहे हैं।

इलाही बोले- भारत के बुद्धिमान लोगों की सराहना करते हैं

नई दिल्ली स्थित ईरानियन कल्चरल सेंटर में आयोजित 'शहीद-ए-उम्मत' के चेहल्लुम के मौके पर इलाही ने अयातुल्ला खामेनेई को याद किया। उन्होंने कहा कि खामेनेई ने अपना पूरा जीवन मानवता, न्याय और सत्य के मार्ग के लिए समर्पित कर दिया। उनकी शहादत को 40 दिन बीत चुके हैं और इस अवसर पर उन्होंने कहा, "हम यहां सिर्फ उन्हें याद करने के लिए ही एकत्रित नहीं हुए हैं। बल्कि हम पूरी ईमानदारी से भारत और यहां के महान, बुद्धिमान और भरोसेमंद लोगों की सराहना करते हैं। हम भारतीय जनता के एहसानमंद हैं।"


साझा मूल्यों और न्याय पर बड़ी बात

ईरानी प्रतिनिधि ने भारतीय समाज के नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में भारतीयों ने जो एकजुटता दिखाई है, वह साझा सिद्धांतों के प्रति आपसी समर्पण को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों ने इंसाफ के प्रति अपनी बुद्धिमत्ता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। श्रद्धांजिल कार्यक्रमों में उमड़ी भारी भीड़ यह साबित करती है कि नैतिक उद्देश्यों के प्रति एक सार्वभौमिक सहमति मौजूद है। इलाही के अनुसार, भारतीयों के हार्दिक संदेशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्य की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती और जागृत हृदय हमेशा न्याय के पक्ष में खड़े रहते हैं।

संकट में भी भारत को मिली प्राथमिकता

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों में 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल मंडराने लगे थे। इसके बाद दुनिया की 'ऑयल लाइफलाइन' कहे जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया गया था, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति ठप हो गई थी। हालांकि, ईरान ने इस भीषण संकट और युद्ध के माहौल में भी भारत, पाकिस्तान और चीन जैसे मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की विशेष मंजूरी दी थी ताकि उनकी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर न पड़े।

पाकिस्तान में शांति वार्ता क्यों रही विफल?

खामेनेई के बाद मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया। लेकिन सत्ता का यह बदलाव क्षेत्रीय कूटनीति में बड़ी विफलता के बीच हो रहा है। हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के इस्लामाबाद से रवाना होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वार्ता पूरी तरह नाकाम रही है। वैंस ने कहा कि समझौता इसलिए नहीं हो सका क्योंकि तेहरान ने वाशिंगटन की 'रेड लाइन्स' (लक्ष्मण रेखा) को मानने से साफ इनकार कर दिया। इसमें मुख्य रूप से परमाणु कार्यक्रम पर रोक और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की शर्तें शामिल थीं। दूसरी तरफ, ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि उनके वार्ताकारों ने 21 घंटे तक अपनी पूरी क्षमता लगाई, लेकिन कोई भी समझौता ईरान के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के बिना संभव नहीं है।

Read More
Next Story