
आखिरी मोड़ पर टूटी वार्ता, ईरान बोला—अमेरिका का सख्त रवैया जिम्मेदार
ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने कहा कि परमाणु मुद्दे, अविश्वास और नाकेबंदी के कारण अमेरिका से समझौता अधर में लटक गया।
ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची (Seyed Abbas Araghchi) ने कहा कि अमेरिका के साथ इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने से वे बस कुछ इंच दूर थे, लेकिन इसी दौरान उन्हें कठोर रुख, बार-बार बदलते लक्ष्य और नाकेबंदी का सामना करना पड़ा।
अराघची की यह टिप्पणी उस बैठक के एक दिन बाद आई है, जब ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि सप्ताहांत में पाकिस्तान में पश्चिम एशिया युद्ध को समाप्त करने के लिए एक स्थायी समाधान खोजने के उद्देश्य से मिले थे, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। इससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि उच्च-स्तरीय वार्ता के दौरान वास्तव में क्या हुआ।
उन्होंने कहा कि ईरान ने “युद्ध समाप्त करने के लिए सद्भावना (गुड फेथ) के साथ” अमेरिका के साथ बातचीत की। अराघची के अनुसार, यह लगभग 50 वर्षों में दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तर की बातचीत थी।
तनाव के बीच वार्ता विफल
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “47 वर्षों में सबसे उच्च स्तर की गहन वार्ता में ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ सद्भावना से बातचीत की। लेकिन जब हम ‘इस्लामाबाद MoU’ से कुछ ही कदम दूर थे, तब हमें मैक्सिमलिज़्म, बदलते लक्ष्य और नाकेबंदी का सामना करना पड़ा। कोई सबक नहीं सीखा गया।”
उन्होंने आगे कहा, “अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है, और दुश्मनी से दुश्मनी।” हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि समझौते के करीब पहुंचकर वार्ता आखिर क्यों विफल हो गई।
इसी बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने भी संकेत दिया कि समझौते की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन उन्होंने अमेरिका से “तानाशाही रवैया छोड़ने” और ईरान के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की।उन्होंने कहा, “यदि अमेरिकी सरकार अपना तानाशाही रवैया छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते निश्चित रूप से मिल जाएंगे।” उन्होंने वार्ता टीम के सदस्यों, विशेष रूप से अपने सहयोगी डॉ. क़ालिबाफ की सराहना भी की।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) जिन्होंने पाकिस्तान में प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, ने कहा कि ईरान समझौता करने के इरादे से वार्ता में शामिल हुआ था, लेकिन उसे दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं हो सका।उन्होंने कहा, “ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भविष्य की दिशा में कई पहलें पेश कीं, लेकिन इस दौर की वार्ता में दूसरा पक्ष हमारा विश्वास हासिल करने में असफल रहा।”
परमाणु मुद्दे पर गतिरोध
वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि वार्ता के दौरान कई बिंदुओं पर सहमति बनी, लेकिन ईरान परमाणु मुद्दे पर झुकने को तैयार नहीं था, जिसे उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बताया।ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “बैठक अच्छी रही, अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बनी, लेकिन सबसे अहम मुद्दा—परमाणु—पर सहमति नहीं बन सकी।”उन्होंने यह भी घोषणा की कि अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले समुद्री यातायात पर नाकेबंदी लागू करेगी।
एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने बड़े अक्षरों में लिखा, “ईरान अपने परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है!” साथ ही उन्होंने ईरान को होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने के खिलाफ चेतावनी भी दी।अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी घोषणा की कि 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश और निकास करने वाले सभी समुद्री यातायात पर नाकेबंदी लागू की जाएगी।दोनों पक्षों ने “सद्भावना” के साथ बातचीत का दावा किया है, लेकिन परमाणु मुद्दे और आपसी अविश्वास के कारण समझौता फिलहाल अधर में लटका हुआ है।

