इजरायली मीडिया का दावा: ट्रंप के दूतों से मिले कलिबाफ, ईरान ने नकारा
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 ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलिबाफ

इजरायली मीडिया का दावा: ट्रंप के दूतों से मिले कलिबाफ, ईरान ने नकारा

ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलिबाफ ने अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत के दावों को नकारा। ट्रंप ने कहा- 'हम ईरान के सबसे सम्मानित नेता से बात कर रहे हैं'।


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US/Israel Vs Iran : पश्चिम एशिया में युद्ध और शांति के बीच एक नई 'इंफॉर्मेशन वॉर' शुरू हो गई है। इजरायली मीडिया ने दावा किया है कि ईरान की संसद के शक्तिशाली अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलिबाफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूतों स्टीव विटकॉफ और जारेड कुश्नर के साथ गुप्त बातचीत कर रहे हैं। इस खबर ने तेहरान से लेकर वाशिंगटन तक खलबली मचा दी है। हालांकि, कलिबाफ ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें इजरायल का 'दुष्प्रचार' करार दिया है। कलिबाफ का कहना है कि ये फर्जी खबरें केवल तेल और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करने के लिए फैलाई जा रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ ईरान किसी भी बातचीत से इनकार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ईरान के एक 'बेहद सम्मानित वरिष्ठ नेता' के संपर्क में है और बातचीत में 'सहमति के बड़े बिंदु' उभरे हैं।



कलिबाफ का पलटवार: 'इजरायली साजिश का हिस्सा है यह खबर'
संसद अध्यक्ष कलिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "ईरानी जनता हमलावरों को कड़ा सबक सिखाने की मांग कर रही है। सभी अधिकारी सर्वोच्च नेता के पीछे मजबूती से खड़े हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है और इजरायल अपनी 'दलदल' से बचने के लिए इस तरह की फेक न्यूज का सहारा ले रहा है। समर्थकों का मानना है कि इजरायल कलिबाफ की छवि बिगाड़ने और ईरान के भीतर अविश्वास पैदा करने के लिए ऐसे झूठ फैला रहा है।

ट्रंप की जिद: 'हमारी बातचीत जारी है'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दावों पर अडिग हैं। उन्होंने प्रेस से बात करते हुए कहा कि अमेरिका केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि ईरान के कई नेताओं से बात कर रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे ईरान के नए सर्वोच्च नेता से नहीं, बल्कि एक अन्य 'सबसे सम्मानित' वरिष्ठ नेता से बात कर रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, बातचीत का मुख्य उद्देश्य तेहरान को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं और संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का भंडार छोड़ने के लिए राजी करना है। इसी 'प्रगति' का हवाला देते हुए ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को 5 दिनों के लिए टालने का एलान किया है।

ईरानी विदेश मंत्रालय का रहस्यमयी बयान
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई हामनेह ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ईरान को 'मित्र देशों' के माध्यम से अमेरिका के संदेश मिले हैं, जिनमें युद्ध समाप्त करने और बातचीत शुरू करने का आग्रह किया गया है। हामनेह के अनुसार, इन संदेशों का जवाब ईरान के सिद्धांतों के अनुरूप दिया गया है। हालांकि, उन्होंने पिछले 24 दिनों में वाशिंगटन के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर हमला हुआ, तो सशस्त्र बल इसका 'त्वरित और निर्णायक' जवाब देंगे।

बाजार और परमाणु मुद्दे पर फंसा पेंच
ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपना यूरेनियम भंडार पूरी तरह सरेंडर कर दे। ट्रंप ने कहा, "हम चाहते हैं कि कोई संवर्धन (Enrichment) न हो और हमें सारा संवर्धित यूरेनियम भी चाहिए।" दूसरी ओर, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की उम्मीदों के बीच तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि क्या वास्तव में पर्दे के पीछे कोई बड़ी डील पक रही है या यह केवल 5 दिन की शांति के बाद आने वाले किसी बड़े तूफान की आहट है।


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