Strait Of Hormuz Crisis : वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर दुनिया के दो शक्तिशाली देशों, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब युद्ध की कगार पर पहुँच गया है। ईरानी संसद के सदस्य अलादीन बोरुजेर्दी के एक हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी है। बोरुजेर्दी ने दावा किया है कि ईरान अब इस संकरे समुद्री मार्ग से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से 20 लाख डॉलर (लगभग 17 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम 'ट्रांजिट शुल्क' वसूल रहा है। इस कदम को ईरान के नए 'संप्रभु शासन' के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि, नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने आधिकारिक तौर पर इन दावों को व्यक्तिगत राय बताते हुए खारिज कर दिया है। लेकिन इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को विनाशकारी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देकर स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।
ट्रंप की चेतावनी: 48 घंटे और महाविनाश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर सीधे शब्दों में ईरान को चुनौती देते हुए 48 घंटे की समय सीमा तय की थी और कहा था कि यदि ईरान ने हॉर्मुज के रास्ते को बिना किसी शर्त और खतरे के पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उनके ऊर्जा ढांचे को तहस-नहस कर देगा। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि अमेरिकी सेना ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट से हमला शुरू करेगी और उनके बिजली उत्पादन केंद्रों को पूरी तरह मिटा देगी। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से ही बाधित है और दर्जनों जहाज इस समुद्री मार्ग में फंसे हुए हैं।
ईरान का पलटवार: इजरायल और अमेरिका निशाने पर
ईरान ने अमेरिका की इस धमकी का जवाब और भी कड़े शब्दों में दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान को नक्शे से मिटाने का भ्रम केवल हताशा का प्रतीक है। उन्होंने साफ किया कि हॉर्मुज का रास्ता केवल उन लोगों के लिए बंद है जो ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं। इसके साथ ही, ईरानी सांसद बोरुजेर्दी ने जवाबी चेतावनी दी है कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो इजरायल का पूरा ऊर्जा नेटवर्क ईरान की पहुंच के भीतर है। उन्होंने दावा किया कि वे इजरायल के सभी पावर और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को महज एक दिन में राख कर सकते हैं।
भारत पर असर और कूटनीतिक हलचल
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल आपूर्ति भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। इस संकट की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर विस्तार से बात की है। युद्ध शुरू होने के बाद से यह उनकी दूसरी बातचीत है। भारत ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन का सुरक्षित और खुला रहना वैश्विक स्थिरता के लिए अनिवार्य है। फिलहाल भारतीय हितों से जुड़े कई जहाज इस क्षेत्र में मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
कच्चे तेल का बाजार और IEA की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने इसे 1970 के दशक के बाद का सबसे भीषण ऊर्जा संकट बताया है। उनके अनुसार, दुनिया पहले ही प्रतिदिन 11 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति खो चुकी है। यह नुकसान पिछले दो बड़े ऐतिहासिक तेल संकटों के संयुक्त प्रभाव से भी अधिक है। बाजार में लिक्विडिटी कम होने के बावजूद ब्रेंट क्रूड की कीमतें $112 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि ट्रंप का अल्टीमेटम हकीकत में बदलता है, तो तेल की कीमतें $120 से $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक महंगाई को अनियंत्रित कर देगी।