ईरान युद्ध का असर, जानें- खाड़ी में पीने का कितना पानी बनता है समुद्र से?
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ईरान युद्ध का असर, जानें- खाड़ी में पीने का कितना पानी बनता है समुद्र से?

ईरान को लेकर अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच खाड़ी क्षेत्र के डिसेलिनेशन प्लांट निशाने पर आए हैं। इससे जल संकटग्रस्त देशों में पानी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है।


मध्य पूर्व में चल रहे ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजराइली जंग ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि दुनिया के सबसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में से एक में जल ढांचा कितना असुरक्षित है। इस संघर्ष के दौरान पानी की आपूर्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण प्लांट निशाने पर आ गईं, जिससे लाखों लोगों के लिए पानी की उपलब्धता पर खतरा पैदा हो गया है।

हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने क़ेश्म द्वीप (Qeshm Island) पर स्थित एक समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र (डिसेलिनेशन प्लांट) पर हमला किया। बताया गया कि इस हमले से 30 गांवों की जल आपूर्ति बाधित हो गई। इसके केवल 24 घंटे बाद Bahrain ने कहा कि एक ईरानी ड्रोन हमले से Muharraq के पास स्थित उसके एक डिसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचा।

खाड़ी क्षेत्र में जल संकट की गंभीरता

खाड़ी क्षेत्र के छह देश बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात दुनिया के सबसे अधिक जल-संकट वाले देशों में गिने जाते हैं। इन देशों की कुल आबादी लगभग 6.2 करोड़ से अधिक है और उनकी जल आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा समुद्री पानी को मीठा बनाकर पूरा किया जाता है। इस क्षेत्र में बारिश बहुत कम होती है और स्थायी नदियां लगभग नहीं हैं। इसलिए इन देशों को अपने तेजी से बढ़ते शहरों, उद्योगों और कृषि क्षेत्रों के लिए भूजल और डिसेलिनेशन पर निर्भर रहना पड़ता है।

खाड़ी में स्थायी नदियों का अभाव

खाड़ी के अधिकांश देश रेगिस्तानी हैं और यहां कोई स्थायी नदी नहीं बहती। हालांकि कभी-कभी बारिश के दौरान अस्थायी जलधाराएं बनती हैं जिन्हें वाडी (Wadi) कहा जाता है। लेकिन ये लंबे समय तक पानी उपलब्ध नहीं करा पातीं। इसी कारण इस क्षेत्र में प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत बहुत सीमित हैं और पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए वैकल्पिक तरीकों की आवश्यकता पड़ती है।

डिसेलिनेशन से हर साल खरबों लीटर पानी

खाड़ी देश दुनिया के कुल डिसेलिनेटेड (समुद्री पानी से तैयार) पानी का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन करते हैं। इस क्षेत्र में तटीय इलाकों में 400 से अधिक डिसेलिनेशन प्लांट काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यदि किसी देश में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 500 घन मीटर से कम पानी उपलब्ध है तो उसे गंभीर जल-संकट की श्रेणी में रखा जाता है।

खाड़ी देशों में प्राकृतिक मीठे पानी की उपलब्धता औसतन केवल लगभग 120 घन मीटर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष है। इसलिए इन देशों को मांग और आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर डिसेलिनेशन का सहारा लेना पड़ता है।

GCC Statistical Center की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी के छह देशों ने उस वर्ष समुद्री पानी को मीठा बनाकर लगभग 7.2 अरब घन मीटर (करीब 1.9 ट्रिलियन गैलन) पानी तैयार किया। यह प्रति व्यक्ति लगभग 122 घन मीटर सालाना या लगभग 334 लीटर प्रतिदिन के बराबर है।इन देशों की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता इससे भी अधिक है और लगभग 26.4 अरब घन मीटर प्रतिवर्ष आंकी जाती है।

किस देश ने कितना पानी बनाया

खाड़ी देशों में सबसे अधिक आबादी और क्षेत्रफल वाला देश सऊदी अरब (Saudi Arabia) है, जिसकी आबादी लगभग 3.7 करोड़ है। इसने 2023 में लगभग 3 अरब घन मीटर डिसेलिनेटेड पानी का उत्पादन किया। इसके बाद यूएई 1.9 अरब घन मीटर, कुवैत 0.8 अरब घन मीट, कतर 0.7 अरब घन मीटर, ओमान 0.5 अरब घन मीटर, बहरीन 0.3 अरब घन मीटर पानी का उत्पादन किया।

किन देशों को डिसेलिनेशन पर सबसे ज्यादा निर्भरता

कतर में कुल जल आपूर्ति का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा डिसेलिनेशन से आता है। पीने के पानी के मामले में यह निर्भरता 99 प्रतिशत से भी अधिक है।

बहरीन, अपनी कुल जल आपूर्ति का लगभग 59 प्रतिशत समुद्री पानी को मीठा बनाकर प्राप्त करता है, जबकि पीने के पानी का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी प्रक्रिया से आता है।

कुवैत, अपनी सालाना जल खपत का लगभग 47 प्रतिशत डिसेलिनेशन से प्राप्त करता है और लगभग 51 प्रतिशत भूजल से।

संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 41 प्रतिशत पानी डिसेलिनेशन से और 46 प्रतिशत भूजल से प्राप्त होता है।

ओमान में कुल जल आपूर्ति का लगभग 23 प्रतिशत हिस्सा समुद्री पानी को मीठा बनाकर प्राप्त किया जाता है, जबकि अधिकांश पानी भूजल से आता है।

सऊदी अरब दुनिया में सबसे अधिक डिसेलिनेटेड पानी का उत्पादन करता है, लेकिन इसकी कुल जल आवश्यकता का केवल लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा ही इस प्रक्रिया से आता है। देश की 79 प्रतिशत जरूरतें अभी भी भूजल से पूरी होती हैं।

डिसेलिनेशन कैसे काम करता है

डिसेलिनेशन वह प्रक्रिया है जिसमें समुद्री पानी से नमक और खनिजों को हटाकर उसे पीने और सिंचाई के लिए उपयुक्त बनाया जाता है। इसके दो प्रमुख तरीके हैं थर्मल डिस्टिलेशन और रिवर्स ऑस्मोसिस।

थर्मल डिस्टिलेशन

इस पारंपरिक तरीके में समुद्री पानी को गर्म किया जाता है ताकि वह भाप बन जाए। भाप में नमक और खनिज नहीं होते, इसलिए उसे ठंडा करके दोबारा पानी में बदला जाता है। बाद में इसमें आवश्यक खनिज मिलाए जाते हैं और इसे कीटाणुरहित किया जाता है ताकि यह पीने योग्य बन सके।

रिवर्स ऑस्मोसिस

इस आधुनिक तकनीक में समुद्री पानी को बहुत अधिक दबाव के साथ एक अर्ध-पारगम्य झिल्ली से गुजारा जाता है। यह झिल्ली नमक और खनिजों को रोक लेती है जबकि पानी के अणु पार हो जाते हैं। आज के समय में रिवर्स ऑस्मोसिस अधिक लोकप्रिय हो गया है क्योंकि यह सस्ता है, कम ऊर्जा खर्च करता है और समुद्र में गर्म पानी छोड़कर होने वाले प्रदूषण को भी कम करता है।

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जल आपूर्ति की संरचनाएं भी युद्ध के दौरान संवेदनशील लक्ष्य बन सकती हैं। खाड़ी देशों की भारी निर्भरता डिसेलिनेशन पर है, इसलिए यदि इन संयंत्रों को नुकसान पहुँचता है तो लाखों लोगों के लिए पानी की उपलब्धता तुरंत प्रभावित हो सकती है।

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