ईरान के खर्ग द्वीप पर अमेरिका ने 50 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
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ईरान के इस खर्ग द्वीप पर इससे पहले अमेरिका ने 13 मार्च को हमला बोला था

ईरान के खर्ग द्वीप पर अमेरिका ने 50 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

ये हमले उस समय हुए जब ईरान ने अमेरिका समर्थित एक और युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। यह संघर्ष अब अपने छठे सप्ताह में पहुंच चुका है।


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अमेरिका ने ईरान की लाइफ लाइन कहे जाने वाले खर्ग द्वीप पर अंधाधुंध बमबारी की है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया है कि मंगलवार को खर्ग आइसलैंड पर कई हमले किए गए।

ये हमले उस समय हुए जब डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को Strait of Hormuz खोलने के लिए दी गई समय-सीमा समाप्त होने वाली थी। The Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर 50 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

Axios के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया है कि एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने इस द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर हमले किए।

ईरान की चेतावनी

हमलों के बाद, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी कि “अब संयम खत्म हो चुका है।”

यह हमला उस दिन के ठीक बाद हुआ जब ईरान ने अमेरिका समर्थित युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।

क्यों अहम है खर्ग द्वीप?

खर्ग आईसलैंड ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है। ईरान का लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। इसके जरिये ईरान हर साल करीब 950 मिलियन बैरल तेल का प्रबंधन करता है। इसकी कुल 31 मिलियन बैरल स्टोरेज क्षमता है।

यह द्वीप फारस की खाड़ी में ईरान के तट से लगभग 50 किमी दूर स्थित है और बड़े तेल व गैस क्षेत्रों से पाइपलाइनों के जरिए जुड़ा हुआ है। इसकी गहरे पानी की सुविधा (deep-water) के कारण बड़े तेल टैंकर यहां रुक सकते हैं—जो ईरान के कई अन्य तटीय क्षेत्रों में संभव नहीं है।

खर्ग पर अब तक के हमले
खर्ग द्वीप पर अमेरिका ने पहला हमला 13 मार्च को किया था। तब यहां के 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। हालांति उस हमले में ईरान की तेल सुविधाएं सुरक्षित रहीं।

इसके बाद खर्ग पर दूसरा हमला 7 अप्रैल को किया गया और ईरान के सैन्य ठिकानों पर फिर से कार्रवाई की गई। अब तक तेल और गैस से जुड़ी बड़ी सुविधाओं को जानबूझकर नुकसान से बचाया गया है, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर न हो।

क्या-क्या निशाना बना?

सैटेलाइट विश्लेषण के अनुसार, पिछले हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार साइट, एयरपोर्ट, हेलीकॉप्टर हैंगर, नौसैनिक ठिकाने, मिसाइल बंकर जैसे ठिकानों को निशाना बनाया गया।

खर्ग द्वीप पर किसी भी बड़े हमले का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता हैं। Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल व्यापार पर असर पड़ सकता है।

ट्रंप का बयान

हमलों के बाद अमरेिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया,“एक पूरी सभ्यता आज रात खत्म हो जाएगी… मैं नहीं चाहता, लेकिन शायद ऐसा होगा।”

हालांकि, इस बयान का सीधे तौर पर खर्ग द्वीप पर हमलों से कोई स्पष्ट संबंध नहीं बताया गया है, लेकिन खर्ग द्वीप पर हमले इस युद्ध को और खतरनाक मोड़ पर ले जा सकते हैं। यह सिर्फ सैन्य टकराव नहीं, बल्कि ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्थिरता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।

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