Iran Vs USA - Israel: ईरान की राजधानी तेहरान में स्वास्थ्य पर्यटन का प्रतीक माना जाने वाला गांधी होटल-अस्पताल परिसर इजरायली हवाई हमलों में पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया है। रविवार को हुए इस भीषण हमले में इजरायल के 100 लड़ाकू विमानों ने तेहरान के हृदय स्थल को निशाना बनाया। 32,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैला यह आधुनिक चिकित्सा केंद्र अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा 2008-2009 में स्थापित किया गया था। यह परिसर न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जाना जाता था। हमले के समय अस्पताल की 17 मंजिलों और होटल की 21 मंजिलों में बड़ी संख्या में मरीज और विदेशी पर्यटक मौजूद थे। चश्मदीदों के अनुसार, धमाके इतने भीषण थे कि पूरा इलाका थर्रा उठा। इजरायली रक्षा बल (IDF) ने इसे सैन्य कमांड केंद्रों के खिलाफ एक सटीक कार्रवाई बताया है, जबकि ईरान ने इसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर सीधा हमला करार दिया है। इस घटना ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध को एक नए और विनाशकारी स्तर पर पहुँचा दिया है।
अस्पताल में तबाही और मरीजों का रेस्क्यू
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली हवाई हमलों में गांधी अस्पताल को अपूरणीय क्षति पहुंची है। गांधी स्ट्रीट इलाके के चश्मदीदों ने बताया कि धमाके इतने तेज थे कि पूरी इमारत हिल गई। हमले के तुरंत बाद अस्पताल प्रशासन और स्थानीय लोगों ने मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। ईरान की आधिकारिक न्यूज एजेंसियों 'फार्स' और 'मिजान' द्वारा जारी वीडियो फुटेज में अस्पताल के वार्डों और गलियारों में फैला मलबा और टूटी हुई व्हीलचेयर देखी जा सकती हैं। आईएसएनए (ISNA) न्यूज एजेंसी ने इस तबाही के लिए सीधे तौर पर अमेरिकी और इजरायली वायु सेना को जिम्मेदार ठहराया है।
ईरान का भीषण पलटवार: दुबई और सऊदी तक पहुंची आग
इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने भी शांत न बैठते हुए अब तक का सबसे बड़ा जवाबी हमला किया है। ईरान की ओर से इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे गए। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की मिसाइलों ने सऊदी अरब की राजधानी और दुबई स्थित रणनीतिक ठिकानों की ओर रुख किया है। ईरान के इस कदम से साफ है कि अब यह युद्ध केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी चपेट में पूरा खाड़ी क्षेत्र और अरब जगत आ गया है। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा हो गई है।
अयातुल्ला अली रजा अराफी ने संभाली कमान
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान इस समय गंभीर आंतरिक संकट और सत्ता हस्तांतरण के दौर से गुजर रहा है। देश की कमान फिलहाल तीन सदस्यीय 'लीडरशिप काउंसिल' के हाथों में है। इस काउंसिल के प्रमुख सदस्य अयातुल्ला अली रजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जब तक ईरान के नए स्थाई सर्वोच्च नेता का चयन नहीं हो जाता, तब तक अराफी ही युद्ध और आंतरिक प्रशासन से जुड़े सभी बड़े फैसले लेंगे। सैन्य कमांडरों के साथ उनकी बैठकें जारी हैं, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान पीछे हटने के मूड में नहीं है।
इजरायल का रुख और भविष्य की रणनीति
इजरायली रक्षा बल के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने स्पष्ट किया है कि उनके हमले तेहरान के मध्य और रणनीतिक इलाकों पर केंद्रित हैं। इजरायल का कहना है कि वे ईरान की उस क्षमता को खत्म कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल इजरायल पर हमले के लिए किया जा सकता है। 100 विमानों के इस हमले को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का विस्तार माना जा रहा है। अमेरिका और इजरायल का संयुक्त लक्ष्य ईरान के कमांड स्ट्रक्चर को पूरी तरह से पंगु बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमले इसी तरह जारी रहे, तो आने वाले दिनों में जमीनी युद्ध की स्थिति भी बन सकती है।
वैश्विक व्यवस्था पर संकट के बादल
ईरान द्वारा दुबई और सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर किए गए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को सकते में डाल दिया है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ईरान ने 'रेड लाइन' पार कर दी है, जिससे अब अमेरिका की सीधी भागीदारी और बढ़ सकती है। दुबई जैसे वैश्विक व्यापारिक केंद्रों पर हमले से दुनिया भर की शेयर मार्केट और एयरलाइन सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियों ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है, लेकिन युद्ध की तीव्रता को देखते हुए शांति की उम्मीदें फिलहाल धुंधली नजर आ रही हैं।