Israel Iran War: मिसाइलों की रेस में ईरान से पिछड़ रहा अमेरिका? पेंटागन की रिपोर्ट ने उड़ाई नींद!
x

Israel Iran War: मिसाइलों की रेस में ईरान से पिछड़ रहा अमेरिका? पेंटागन की रिपोर्ट ने उड़ाई नींद!

ईरान के साथ जारी युद्ध के चौथे दिन एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, ईरान हर महीने लगभग 100 मिसाइलों का उत्पादन कर रहा है।


Israel Iran War: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा भीषण संघर्ष आज अपने चौथे दिन में प्रवेश कर गया है। जहां एक ओर युद्ध की ज्वाला भड़की हुई है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा विभाग 'पेंटागन' की एक गोपनीय रिपोर्ट लीक होने से सनसनी फैल गई है। संकेत मिल रहे हैं कि अगर अमेरिका ने अगले 10 दिनों तक इसी रफ्तार से हमले जारी रखे, तो उसके मिसाइलों का भंडार खाली हो सकता है।

ईरान का जबरदस्त पलटवार

यह पूरा घटनाक्रम पिछले शुक्रवार को तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु वार्ता पर नाराजगी जताते हुए एक बड़े सैन्य ऑपरेशन का आदेश दिया। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और शीर्ष कमांडर मारे गए। बदले की आग में जल रहे ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर और यूएई में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों की बरसात कर दी है।

पेंटागन बनाम ट्रंप: दावों में भारी अंतर

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के अधिकारियों और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति ट्रंप को गंभीर चेतावनी दी है। इजरायल और यूक्रेन की मदद के कारण अमेरिका का 'वेपन रिजर्व' पहले से ही निचले स्तर पर है। इसके उलट, ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर दावा किया कि अमेरिका के पास हथियारों का "असीमित भंडार" है और यह युद्ध "हमेशा के लिए" लड़ा जा सकता है।

100 बनाम 7 की जंग?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है जो भविष्य की डरावनी तस्वीर दिखाता है। ईरान हर महीने लगभग 100 मिसाइलें बना रहा है। इसके मुकाबले अमेरिका एक महीने में सिर्फ 6 से 7 इंटरसेप्टर ही बना पा रहा है।

THAAD और SM-3: पिछले युद्धों में अमेरिका अपने THAAD इंटरसेप्टर्स का 25% हिस्सा पहले ही इस्तेमाल कर चुका है। जहाजों से लॉन्च होने वाली SM-3 मिसाइलों की संख्या भी तेजी से घट रही है।

क्या अमेरिका हो रहा है फेल?

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का 'मिसाइल डिफेंस शील्ड' रूस या चीन जैसे बड़े देशों के कम समय वाले हमलों के लिए बना था। ईरान जैसे देश जो लगातार और सस्ते रॉकेटों से हमला करते हैं, उनके सामने अमेरिका की महंगी और कम संख्या वाली मिसाइलें जल्द खत्म होने की कगार पर हैं।

Read More
Next Story