किटकैट बार से लेकर बीनी बेबीज़ तक, ये हैं दुनिया की अजीबोगरीब डकैतियां
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प्रतिनिधि चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स

किटकैट बार से लेकर बीनी बेबीज़ तक, ये हैं दुनिया की अजीबोगरीब डकैतियां

एक हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए नेस्ले ने कहा कि अपराधियों ने ब्रांड के मशहूर ‘टेक अ ब्रेक’ स्लोगन को “कुछ ज्यादा ही शाब्दिक रूप से” ले लिया...


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हाल के समय की सबसे असामान्य चोरी की घटनाओं में से एक में, इटली में चोर 12 टन से अधिक किटकैट चॉकलेट बार लेकर फरार हो गए, वह भी ईस्टर से ठीक कुछ दिन पहले। यह खेप Nestlé की थी और इसे मध्य इटली से पोलैंड ले जाया जा रहा था, जब गुरुवार (26 मार्च) को इसे हाईजैक कर लिया गया। कंपनी ने बताया कि ट्रक को फैक्ट्री से निकलने के बाद ही चुरा लिया गया।

चोरी हुए माल में लगभग 4.14 लाख यूनिट शामिल थीं, जो किटकैट की नई फॉर्मूला-वन थीम वाली रेंज का हिस्सा थीं। यह रेंज उस साझेदारी का परिणाम है, जिसके तहत पिछले साल किटकैट को आधिकारिक F1 चॉकलेट बार बनाया गया था। इन चॉकलेट्स को रेस कार के आकार में ढाला गया था, जिनमें किटकैट की पहचान वाली चॉकलेट-लेपित वेफर्स मौजूद थीं।

हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए नेस्ले ने कहा कि अपराधियों ने ब्रांड के मशहूर “टेक-अ-ब्रेक” स्लोगन को “कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया।” कंपनी ने पुष्टि की कि ट्रक और चॉकलेट अभी भी लापता हैं। लेकिन उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।

कंपनी ने कहा, “हम अपराधियों की बेहतरीन पसंद की सराहना करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि कार्गो चोरी छोटे-बड़े सभी व्यवसायों के लिए तेजी से बढ़ती समस्या बन रही है।”

अधिकारियों ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है, जबकि कंपनी ने चेतावनी दी है कि चोरी किया गया सामान गैर-आधिकारिक बाजारों में दिखाई दे सकता है।

यूरोप में ‘मीठी’ चोरी की घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब चॉकलेट चोरी का निशाना बनी हो।

2017 में जर्मनी में चोरों ने 20 टन नुटेला और किंडर उत्पादों से भरा ट्रक चुरा लिया था, जिसकी कीमत लगभग 80,000 डॉलर थी। दिलचस्प बात यह रही कि उसी सप्ताहांत में एक अलग ट्रक, जिसमें फलों का जूस था, वह भी चोरी हो गया था।

चर्चित ‘बेकर स्ट्रीट’ डकैती

इतिहास की सबसे दिलचस्प डकैतियों में से एक 1971 की बेकर स्ट्रीट रॉबरी मानी जाती है।

इसमें एक गिरोह ने पास की दुकान से सुरंग बनाकर बैंक के वॉल्ट तक पहुंच बनाई और 268 सेफ डिपॉजिट बॉक्स लूट लिए। इस लूट की कीमत आज के समय में लाखों में आंकी जाती है। इस घटना को लेकर कई साजिश सिद्धांत भी प्रचलित हैं, जिनमें एक दावा यह भी है कि चोरों को ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ने राजकुमारी मार्गरेट की कथित तस्वीरें हासिल करने के लिए भेजा था।

जब कीड़े भी बने निशाना

2018 में अमेरिका के फिलाडेल्फिया कीट संग्रहालय और तितली उद्यान में चोरों ने लगभग 7,000 जीवित जीव-जिनमें टारेंटुला, कॉकरोच और गेको शामिल थे, चुरा लिए।

पुलिस को संदेह था कि यह अंदरूनी साजिश हो सकती है और इन जीवों को अवैध विदेशी पालतू जानवरों के बाजार में बेचा जाना था। सुरक्षा कैमरों में कई लोगों को प्लास्टिक कंटेनरों में इन जीवों को लेकर बाहर जाते हुए रिकॉर्ड किया गया था, जिनमें विशाल अफ्रीकी मैन्टिस, बंबलबी मिलीपीड, टारेंटुला और लेपर्ड गेको जैसे जीव शामिल थे।

बीनी बेबीज़ की बढ़ती मांग

1990 के दशक में बीनी बेबीज़ जैसे कलेक्टेबल खिलौनों से जुड़ी चोरी की घटनाओं में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई। लोगों के बीच यह अफवाह फैल गई थी कि रंग-बिरंगे इन सॉफ्ट टॉयज़ को सेकेंड-हैंड मार्केट में बेचकर वे अपने स्टूडेंट लोन तक चुका सकते हैं।

1977 के एक मामले में, लगभग 3 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के 1,200 से अधिक खिलौने बरामद किए गए, जो 60,000 खिलौनों की एक बड़ी गायब खेप से जुड़े थे। ये खिलौने इलिनॉय के ग्लेनडेल हाइट्स के 77 वर्षीय कलेक्टर बेन पेरी के पास पाए गए थे। हालांकि, बाद में पेरी को निर्दोष पाया गया। क्योंकि यह साबित नहीं हो सका कि उनके पास चोरी का सामान जानबूझकर था। उन्होंने कहा कि उन्होंने ये खिलौने एक फ्ली मार्केट से खरीदे थे।

तस्करी के नए तरीके

साल 2025 में एक चीनी नागरिक को एयरपोर्ट पर नियमित सुरक्षा जांच के दौरान पकड़ा गया। वह 850 कछुओं की तस्करी करने की कोशिश कर रहा था, जो अमेरिका के मूल निवासी और संरक्षित प्रजाति हैं। उसने उन्हें मोजों में छिपाकर खिलौनों के रूप में गलत लेबल किया था। उसका इरादा उन्हें चीन के ब्लैक पेट मार्केट में बेचने का था। यह इस बात का अजीब उदाहरण है कि मुनाफे के लिए अपराधी किस हद तक जा सकते हैं।

बिहार में तालाब की चोरी

पिछले साल बिहार के दरभंगा जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया, जहां एक सार्वजनिक स्वामित्व वाला पूरा तालाब रहस्यमय तरीके से गायब हो गया और उसकी जगह एक झोपड़ी बना दी गई। बताया गया कि बढ़ती जमीन की कीमतों के कारण यह तालाब भू-माफिया के निशाने पर आ गया था।

हालांकि अधिकारियों ने पहले उस स्थान का दौरा कर कुछ कार्रवाई की थी। लेकिन बदमाशों ने रातोंरात तालाब को भर दिया और पुलिस के पहुंचने तक वे वहां से फरार हो चुके थे।

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