बांग्लादेश में सेना का बढ़ता हस्तक्षेप, तख्तापलट और आपातकाल की अटकलें
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बांग्लादेश में सेना का बढ़ता हस्तक्षेप, तख्तापलट और आपातकाल की अटकलें

Bangladesh army की आपातकालीन बैठक और उसकी 9वीं डिवीजन के ढाका में प्रवेश से सैन्य तख्तापलट या आपातकाल की घोषणा की आशंका की अफवाहों को बल मिला है.


Bangladesh military coup: बांग्लादेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सेना तथा छात्र नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों के बीच देश में सैन्य तख्तापलट, मार्शल लॉ या आपातकाल की आशंका को लेकर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, सेना ने इन अटकलों को अब तक अफवाह बताकर खारिज किया है. लेकिन हाल ही में ढाका में सेना की तैनाती ने इन अटकलों को और हवा दी है.

संकट का संकेत

बांग्लादेश की 9वीं डिवीजन के सैनिकों ने ढाका में धीरे-धीरे तैनाती शुरू कर दी है, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि सेना छात्र-समर्थित अंतरिम सरकार, जो नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद युनूस के नेतृत्व में है, के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. इस कदम से कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने बांग्लादेश में सैन्य हस्तक्षेप की आशंका को फिर से उठाया है.

सेना प्रमुख की नाराजगी

बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वाकर-उ-ज़मानी ने अपने बयान में सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष को व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है कि पिछले कुछ महीनों में जो घटनाएं घटी हैं, वह पूरी तरह से असहनीय हैं. एक महीने पहले, जब उन्होंने सेना के अधिकारियों के साथ एक कार्यक्रम में बातचीत की, तो उन्होंने कहा था, "हम जिस अराजकता का सामना कर रहे हैं, वह हमारे अपने निर्माण का परिणाम है." इसके साथ ही, सेना ने छात्र नेताओं की उस मांग को भी नकारा किया है, जिसमें अवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी. छात्र नेता हसनात अब्दुल्ला ने आरोप लगाया था कि सेना अवामी लीग को फिर से सत्ता में लाने की योजना बना रही है. हालांकि, सेना ने इस आरोप को खारिज किया है.

सेना की आपात बैठक

सेना ने सोमवार को एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें देश की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की गई. सेना प्रमुख जनरल ज़मानी ने इस बैठक की अध्यक्षता की और वहां मौजूद शीर्ष सेना अधिकारियों से कहा कि सेना का मकसद देश में स्थिरता लाना है. खबरों के मुताबिक, सेना राष्ट्रपति पर दबाव बना सकती है कि वह आपातकाल की घोषणा करें या फिर एक तख्तापलट की योजना बनाएं. सेना एक राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है. जो सेना की निगरानी में काम करे.

सेना प्रमुख का बयान

हालांकि, सेना प्रमुख जनरल वाकर-उ-ज़मानी ने तख्तापलट और आपातकाल की अफवाहों को पूरी तरह खारिज किया है. उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की गलत जानकारी और भ्रम को फैलने नहीं दिया जाएगा. ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने अधिकारियों से कहा कि हमारे लिए देश और उसके लोग सर्वोपरि हैं और हमें किसी भी उकसावे से दूर रहना चाहिए.

सैन्य हस्तक्षेप

पिछले सात महीनों से, जब शेख हसीना भारत गईं, बांग्लादेश की सेना नागरिक प्रशासन का समर्थन करने में जुटी हुई है. सेना ने अपने न्यायिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए अंतरिम सरकार के फैसलों को समर्थन दिया है. अब, मुहम्मद युनूस के 26 मार्च से चीन दौरे पर जाने के बाद, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ढाका की राजनीतिक स्थिति किस दिशा में जाती है. बांग्लादेश में सैन्य हस्तक्षेप की स्थिति गंभीर होती जा रही है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या देश को एक नई राजनीतिक दिशा मिलेगी या फिर स्थिति और बिगड़ेगी.

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