USA-Israel Vs Iran : मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार रात दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे प्रमुख शहरों में भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के सैन्य ठिकानों तथा आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाते हुए अपने ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, खाड़ी देशों की राजधानियों में गूंजते धमाकों ने दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। यह जवाबी कार्रवाई उस वक्त हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अब बातचीत के लिए बहुत देर हो चुकी है। युद्ध के चौथे दिन हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई देशों ने अपना एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी दूतावासों और तेल सुविधाओं पर भी मिसाइलें गिरने की खबरें हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी और सैन्य कार्रवाई
मंगलवार को तेहरान में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कड़ा संदेश जारी किया। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की वायुसेना, नौसेना और नेतृत्व अब खत्म हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ईरान से किसी भी प्रकार की शांति वार्ता संभव नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महज चार दिन पहले इजरायली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इजरायली सेना ने तेहरान में एक 'बड़े स्तर की' स्ट्राइक की घोषणा की है, जिसमें सरकारी भवनों और प्रमुख हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया है। तेहरान के आसमान में धुएं के गुबार साफ देखे जा सकते हैं।
आर्थिक केंद्रों और तेल ठिकानों पर प्रहार
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उनके मुख्य केंद्रों पर हमला जारी रहा, तो वे पूरे क्षेत्र के आर्थिक केंद्रों को तबाह कर देंगे। जनरल इब्राहिम जब्बारी ने कहा कि ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत जुलाई 2024 के बाद पहली बार 85 डॉलर के पार पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमतें जल्द ही 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। खाड़ी देशों में स्थित तेल रिफाइनरियों पर हुए ड्रोन हमलों ने ऊर्जा संकट का खतरा पैदा कर दिया है।
विमान सेवाओं पर बड़ा असर
युद्ध की आग ने वैश्विक विमानन क्षेत्र को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। एविएशन डेटा फर्म सीरियम के अनुसार, शनिवार से सोमवार के बीच करीब 12,903 उड़ानें रद्द की गई हैं। यह कुल नियोजित उड़ानों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है। हवाई क्षेत्र बंद होने से अंतरराष्ट्रीय रूट डायवर्ट किए गए हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट के प्रमुख हब जैसे दुबई और दोहा एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन ठप होने की कगार पर है।
धार्मिक और सरकारी इमारतों को बनाया निशाना
इजरायली सेना का मुख्य लक्ष्य ईरान की हथियार निर्माण इकाइयां और बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स हैं। ताजा हमलों में तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट और धार्मिक शहर कोम (Qom) स्थित उस इमारत को भी निशाना बनाया गया है, जहां ईरान के नए सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया चल रही थी। तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अब "नरक के दरवाजे" अमेरिका और इजरायल के लिए खुल चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है, लेकिन युद्ध की तीव्रता कम होने का नाम नहीं ले रही है।