Iran's New Supreme Leader Mojtaba Khamenei : ईरान में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) नियुक्त किया गया है। मोजतबा, दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने इस उत्तराधिकारी के नाम पर मुहर लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान एक गहरे नेतृत्व संकट से गुजर रहा था। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया था। इस हमले ने न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया के राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। मोजतबा खामेनेई का चुना जाना ईरान की भविष्य की नीतियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डिस्कवर पर यह खबर इस वक्त सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रही है।
मोजतबा खामेनेई का चयन और असेंबली का फैसला
ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुनकर कड़ा संदेश दिया है। इजरायली मीडिया ने सबसे पहले इस खबर की पुष्टि की थी। मोजतबा लंबे समय से पर्दे के पीछे से सरकार और सेना में सक्रिय रहे हैं। उन्हें अपने पिता का सबसे भरोसेमंद सलाहकार माना जाता था। हालांकि, ईरान के धार्मिक हलकों में पिता के बाद बेटे का शासन चर्चा का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना के दबाव में यह फैसला लिया गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का मोजतबा को पूरा समर्थन हासिल है। अब मोजतबा के कंधों पर देश को युद्ध की स्थिति से बाहर निकालने की चुनौती है।
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और खामेनेई की मौत
28 फरवरी 2026 को ईरान के इतिहास का सबसे भीषण हमला हुआ था। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को अंजाम दिया था। इस हमले का मुख्य लक्ष्य तेहरान स्थित खामेनेई का सरकारी परिसर था। इस हमले में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौके पर ही मौत हो गई थी। उनके साथ उनकी बेटी, दामाद और पोती की भी जान चली गई थी। वाशिंगटन ने दावा किया था कि ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियां फिर शुरू कर दी थीं। परमाणु वार्ता विफल होने के बाद यह हमला अंतिम विकल्प बताया गया था। इस स्ट्राइक ने ईरान के डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।
ईरान में सत्ता संघर्ष और आगे की राह
खामेनेई की मौत के बाद ईरान में गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। कई वरिष्ठ मौलवी मोजतबा के चयन के विरोध में बताए जा रहे थे। लेकिन वर्तमान युद्ध की स्थिति ने कट्टरपंथियों को एकजुट कर दिया है। मोजतबा खामेनेई के पास अब परमाणु कार्यक्रम पर फैसला लेने का अधिकार होगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बदलाव को बहुत बारीकी से देख रहा है। इजरायल ने मोजतबा के चयन पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। वहीं, अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह तनाव कम करने की पहल करे।
क्षेत्रीय शांति और वैश्विक प्रभाव
मोजतबा खामेनेई का नेतृत्व ईरान को किस दिशा में ले जाएगा, यह अनिश्चित है। मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है और तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यदि मोजतबा बदला लेने की नीति अपनाते हैं, तो बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। दूसरी ओर, ईरान के भीतर भी जनता में भारी असंतोष देखा जा रहा है। कई शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की खबरें भी मिल रही हैं। अब दुनिया की नजरें मोजतबा के पहले राष्ट्र के नाम संबोधन पर टिकी हैं। क्या वे शांति का रास्ता चुनेंगे या संघर्ष जारी रखेंगे, यह वक्त बताएगा।