
नेपाल चुनाव में बहुत बड़ा उलटफेर, रैपर से नेता बने बालेन शाह ने 4 बार के पीएम रहे ओली को हराया
नेपाल में पिछले साल जेन-ज़ी आंदोलन के दौरान पीएम ओली के पद छोड़ने के बाद अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए बालेन का नाम सामने आया था। लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
नेपाल की राजनीति में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह ने चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को भारी मतों से हराकर सबको चौंका दिया है। इस जीत के साथ ही उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) देश में सरकार बनाने की ओर तेजी से बढ़ रही है, जबकि पारंपरिक राजनीतिक दलों को बड़ा झटका लगा है।
शनिवार को घोषित नतीजों में आरएसपी नेता बालेंद्र शाह, जिन्हें ‘बालेन’ के नाम से भी जाना जाता है, ने झापा-5 सीट पर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को करीब 50 हजार वोटों से हराया। निर्वाचन आयोग के अनुसार 35 वर्षीय बालेन को 68,348 वोट मिले, जबकि 74 वर्षीय ओली को 18,734 वोटों से संतोष करना पड़ा।
आरएसपी की बड़ी बढ़त
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में बनी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने घोषित 78 सीटों में से 62 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। काठमांडू जिले की सभी 10 सीटों पर भी पार्टी ने जीत हासिल की है और देशभर में करीब 60 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
इन नतीजों ने नेपाल की पारंपरिक राजनीति को बड़ा झटका दिया है।
बालेन का नेपाल का अगला पीएम बनना तय
35 वर्षीय इंजीनियर, रैपर और अब नेता बने बालेंद्र शाह को नेपाल के अगले प्रधानमंत्री के रूप में भी देखा जा रहा है। चुनाव परिणाम यह भी दिखाते हैं कि देश में स्थापित राजनीतिक दलों के प्रति जनता का असंतोष बढ़ा है। पिछले 18 वर्षों में नेपाल में 14 सरकारें बन चुकी हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता भी एक बड़ा मुद्दा रही है।
कैसे गिरी थी ओली सरकार
पिछले साल 8 और 9 सितंबर को जेन-जी के नेतृत्व में दो दिनों तक हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के बाद नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। उस समय वे नेपाली कांग्रेस के समर्थन वाली गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जिसके पास लगभग दो-तिहाई बहुमत था।
ओली के पद छोड़ने के बाद अंतरिम सरकार के नेतृत्व के लिए बालेंद्र शाह का नाम सामने आया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। उनका कहना था कि वे पूर्ण कार्यकाल के लिए संसदीय चुनाव लड़ना पसंद करेंगे।
इसके बाद जनवरी में वे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हुए और जल्द ही उन्हें पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। चुनाव अभियान के दौरान जेन-जी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई, बेहतर शासन, भाई-भतीजावाद खत्म करने और राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

