ट्रंप के खिलाफ अमेरिका और यूरोप में नो किंग्स रैलियां, लाखों लोग सड़कों पर
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ट्रंप के खिलाफ अमेरिका और यूरोप में 'नो किंग्स' रैलियां, लाखों लोग सड़कों पर

ईरान युद्ध और ट्रंप की नीतियों के खिलाफ वैश्विक विरोध प्रदर्शन। मिनेसोटा में ब्रूस स्प्रिंगस्टीन का प्रदर्शन, 50 राज्यों में 3100 से अधिक रैलियां आयोजित की गईं।


Protest Against Trump In USA Over Iran War : ईरान के साथ जारी युद्ध और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ शनिवार को अमेरिका सहित यूरोप के कई देशों में 'नो किंग्स' (No Kings) रैलियों का आयोजन किया गया। आयोजकों के अनुसार, इन विरोध प्रदर्शनों में लाखों लोगों के शामिल होने का अनुमान है, जिसमें मिनेसोटा मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप प्रशासन की आक्रामक अप्रवासन नीतियों, ईरान युद्ध और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठाई। सेंट पॉल में मिनेसोटा कैपिटल के बाहर हजारों लोग कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए। इस दौरान कई लोगों ने अमेरिकी झंडे को उल्टा पकड़ रखा था, जो ऐतिहासिक रूप से गंभीर संकट का संकेत माना जाता है।

ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने सुरों से भरी हुंकार

मिनेसोटा में आयोजित इस मेगा रैली के मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन रहे। उन्होंने अपना नया गीत "स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस" पेश किया, जो संघीय एजेंटों की गोलीबारी में मारे गए रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी को समर्पित था। स्प्रिंगस्टीन ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी शहरों पर इस तरह के आक्रमण बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने लोगों की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए इसे 'प्रतिक्रियावादी दुःस्वप्न' के खिलाफ एक बड़ी जीत बताया।

अमेरिका के 50 राज्यों में 3100 से अधिक कार्यक्रम

आयोजकों के मुताबिक, इस बार विरोध प्रदर्शन का दायरा पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ा है। शनिवार को अमेरिका के सभी 50 राज्यों में लगभग 3,100 से अधिक कार्यक्रम पंजीकृत किए गए। न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों से लेकर इडाहो के छोटे कस्बों तक लोग सड़कों पर उतरे। वाशिंगटन में प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक मार्च निकाला। यहाँ लोगों ने "पुत डाउन द क्राउन, क्लाउन" जैसे नारों वाली तख्तियां थामी हुई थीं।

व्हाइट हाउस और रिपब्लिकन पार्टी की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, व्हाइट हाउस और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी ने इन रैलियों की तीखी आलोचना की है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अबीगैल जैक्सन ने इन्हें "लेफ्टिस्ट फंडिंग नेटवर्क" का उत्पाद बताया और कहा कि आम जनता का इन्हें समर्थन प्राप्त नहीं है। वहीं, एनआरसीसी (NRCC) की प्रवक्ता मॉरीन ओ'टूल ने इन प्रदर्शनों को "हेट अमेरिका रैलियां" करार देते हुए इन्हें उग्रवादी विचारधारा से प्रेरित बताया।

यूरोप और अन्य देशों में भी दिखा असर

यह विरोध केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। लंदन, पेरिस और रोम जैसे वैश्विक शहरों में भी हजारों लोग युद्ध विरोधी नारों के साथ सड़कों पर उतरे। रोम में प्रदर्शनकारियों ने पीएम जॉर्जिया मेलोनी की सरकार और ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के खिलाफ मार्च निकाला। लंदन में "स्टैंड अप टू रेसिज्म" और पेरिस में ट्रंप के "अंतहीन युद्धों" के खिलाफ प्रदर्शन हुए। आयोजकों ने बताया कि संवैधानिक राजतंत्र वाले देशों में इन प्रदर्शनों को "नो टायेंट्स" (No Tyrants) नाम दिया गया है।



(हेडलाइन को छोड़कर, इस कहानी को द फेडरल स्टाफ ने एडिट नहीं किया है और यह एक सिंडिकेटेड फ़ीड से पब्लिश की गई है।)

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