West Asia Crisis: पीएम मोदी ने जताई चिंता, कहा- शांति के साथ खड़ा है भारत
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West Asia Crisis: पीएम मोदी ने जताई चिंता, कहा- शांति के साथ खड़ा है भारत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर पीएम मोदी ने ब्रिटिश पीएम मार्क कार्नी के साथ चर्चा की। उन्होंने क्षेत्र में स्थिरता पर जोर देते हुए शांति की अपील की है।


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USA-Israel Vs Iran : पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष और इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर भारत ने अपनी चिंताएं स्पष्ट कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति बेहद गंभीर चिंता का विषय है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि "भारत हमेशा शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़ा रहा है।" यह बयान प्रधानमंत्री द्वारा सुरक्षा और रणनीतिक मामलों की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, 'सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति' (CCS) की बैठक की अध्यक्षता करने के ठीक एक दिन बाद आया है। वैश्विक मंच पर भारत की यह सक्रियता दर्शाती है कि क्षेत्र में बिगड़ते हालात का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से भी फोन पर बात की है। भारत लगातार कूटनीतिक रास्तों के जरिए तनाव कम करने की वकालत कर रहा है।




सुरक्षा समिति की बैठक और कूटनीतिक पहल
पश्चिम एशिया में उपजे ताज़ा हालातों का जायजा लेने के लिए पीएम मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में क्षेत्र के बदलते घटनाक्रम और भारत के सामरिक हितों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से टेलीफोन पर संपर्क साधा। इस दौरान मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर बात हुई। भारत इस संकट के समाधान के लिए वैश्विक शक्तियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

कनाडा के पीएम मार्क कार्नी के साथ चर्चा
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हुई मुलाकात में भी मध्य पूर्व का मुद्दा छाया रहा। दोनों नेताओं ने वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। पीएम मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शांति बहाली में भारत की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा जैसे देशों का मिलकर काम करना वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है। कनाडा ने भी भारत के शांति प्रयासों की सराहना की है।

ईरान और खामेनेई के साथ भारत के जटिल संबंध
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ भारत के संबंध काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 2017 से 2024 के बीच खामेनेई ने भारत के आंतरिक मामलों में कम से कम चार बार हस्तक्षेप किया था। हर बार उनके बयानों पर आपत्ति जताते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) को ईरानी दूतों को तलब करना पड़ा था। हालांकि, भारत ने हमेशा कूटनीतिक मर्यादा बनाए रखी, लेकिन खामेनेई का रुख अक्सर भारत के प्रति सख्त रहा। उनके जाने के बाद अब ईरान के नए नेतृत्व के साथ संबंधों की नई दिशा तय होने की उम्मीद है।


वैश्विक शांति के लिए भारत का स्टैंड
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी युद्ध का समर्थन नहीं करता है। पीएम मोदी का "युद्ध का युग नहीं" वाला मंत्र आज भी वैश्विक कूटनीति का आधार बना हुआ है। भारत का मानना है कि संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है जिससे पश्चिम एशिया में शांति बहाल की जा सकती है। भारत की यह तटस्थ और शांतिपूर्ण नीति उसे एक महत्वपूर्ण वैश्विक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करती है।

आर्थिक और सामरिक सुरक्षा पर नजर
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार मार्ग पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सरकार सतर्क है। CCS की बैठक में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर सहमति बनी है। विदेश मंत्रालय लगातार खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों के संपर्क में है और स्थिति की पल-पल निगरानी कर रहा है।


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