ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम: दूतावास पर हमले के बाद सेना उतारने का ऐलान
x

ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम: दूतावास पर हमले के बाद सेना उतारने का ऐलान

यूएस/इजरायल-ईरान युद्ध के चौथे दिन रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला हुआ। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के 1250 ठिकानों पर बमबारी और जमीन पर सैनिक उतारने के संकेत दिए हैं।


Donald Trump's Warning : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब अपने चौथे दिन में प्रवेश कर चुकी है। यह संघर्ष थमने के बजाय और अधिक विनाशकारी होता जा रहा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर ईरान ने दो आत्मघाती ड्रोनों से हमला किया है। इस हमले के बाद दूतावास परिसर में भीषण आग भड़क गई है। जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से सीधी चेतावनी जारी की है। उन्होंने इस सैन्य ऑपरेशन को "हमला करने का आखिरी सबसे अच्छा मौका" करार दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो अमेरिका ईरान की धरती पर अपने सैनिक उतारने से भी पीछे नहीं हटेगा। इस युद्ध की शुरुआत शनिवार को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हुई थी, जिसने पूरे मध्य-पूर्व को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है।


रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला और सुरक्षा अलर्ट
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रियाद के डिप्लोमेटिक क्वार्टर को निशाना बनाकर चार ड्रोन भेजे गए थे। इनमें से दो ड्रोनों ने सीधे अमेरिकी दूतावास पर हमला किया, जिससे वहां भारी नुकसान और आगजनी हुई है। न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, हमले के तुरंत बाद दूतावास ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। वहां मौजूद सभी अमेरिकी नागरिकों को "शेल्टर-इन-प्लेस" यानी तुरंत सुरक्षित स्थानों पर छिपने की सलाह दी गई है। ट्रंप ने कहा कि ईरान को इस दुस्साहस और अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला बहुत जल्द मिल जाएगा।

ट्रंप का बड़ा बयान: एक महीने से ज्यादा चल सकती है जंग
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की समय सीमा को लेकर अहम खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में इस सैन्य अभियान के 4 से 5 सप्ताह तक चलने का अनुमान था। हालांकि, अमेरिका अब लंबे समय तक संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के अनुसार, यह जंग निर्धारित योजना से काफी आगे बढ़ रही है। उन्होंने पहली बार अमेरिका के सैन्य उद्देश्यों को स्पष्ट किया। अमेरिका का लक्ष्य ईरान के मिसाइल प्रोग्राम, उसकी नौसेना और परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट करना है। साथ ही, क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र समूहों के लिए ईरान के समर्थन को हमेशा के लिए बंद करना है।

ईरान में 1250 ठिकानों पर बमबारी और मानवीय संकट
यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने अब तक ईरान में 1250 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इस भीषण गोलाबारी में अब तक छह अमेरिकी सैन्यकर्मी शहीद हो चुके हैं। वहीं, ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों में सैकड़ों आम नागरिक मारे गए हैं। दक्षिणी शहर मिनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में 168 लोगों की मौत की खबर है। इनमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्राएं शामिल हैं। इसके अलावा तेहरान के एक अस्पताल पर भी हमले की सूचना है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन घटनाओं की जांच की बात कही है, हालांकि उन्होंने जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार किया है।

खाड़ी देशों में फैलती युद्ध की आग और तेल संकट
ईरान ने इस हमले का जवाब पूरे खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलें दागकर दिया है। कतर की सेना ने मंगलवार सुबह दो बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया, जो उसके रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रही थीं। वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने धमकी दी है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि वहां से गुजरने वाले किसी भी जहाज को जला दिया जाएगा। बता दें कि दुनिया के 20 प्रतिशत समुद्री तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ऊर्जा संकट का गहरा असर पड़ सकता है।

लेबनान में तबाही और हिजबुल्लाह पर प्रतिबंध
इजरायली युद्धक विमानों ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण बमबारी की है। दक्षिणी उपनगरों में हुए इन हमलों में कम से कम 52 लोगों की मौत हो गई है। हिजबुल्लाह ने अपने आका खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए इजरायल पर रॉकेट दागे थे। स्थिति को बिगड़ता देख लेबनान की सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इजरायल अब भी बेरूत में हिजबुल्लाह के कमांड सेंटरों और हथियारों के जखीरे को निशाना बना रहा है। हजारों परिवार अपनी जान बचाने के लिए सिडोन जैसे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।


Read More
Next Story