खामेनेई शासन घिरा, ईरान पर हमले की सुगबुगाहट, अमेरिका–इजरायल ऑपरेशन की आहट?
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खामेनेई शासन घिरा, ईरान पर हमले की सुगबुगाहट, अमेरिका–इजरायल ऑपरेशन की आहट?

protests in Iran: ईरान की राजधानी तेहरान और देश के कई हिस्सों में हालात बेहद बिगड़ चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई मस्जिदों और इमारतों में आग लगा दी है।


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Iran protests: ईरान में 12 दिनों से सुलग रहा गुस्सा अब सिर्फ विरोध नहीं रहा, बल्कि सत्ता को चुनौती देता एक जनआंदोलन बन चुका है। इंटरनेट बंद है, फोन लाइनें खामोश हैं, लेकिन लोगों की आवाज पहले से ज्यादा बुलंद है। ईरान की सड़कों पर आज सिर्फ भीड़ नहीं है, ऐसा लग रहा है कि मानों वहां इतिहास करवट ले रहा है।

ईरान में गुरुवार रात को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ जोरदार नारे लगाए। स्थिति को काबू में करने के लिए ईरानी सरकार ने देशभर में इंटरनेट बंद कर दिया है। इसके साथ ही ईरान को अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल से भी काट दिया गया है, ताकि लोगों के बीच संपर्क न हो सके।

प्रिंस रेजा पहलवी का आह्वान

गुरुवार रात हुए ये प्रदर्शन निर्वासित ईरानी राजकुमार प्रिंस रेजा पहलवी के आह्वान के बाद तेज हुए। उनके संदेश के बाद लोग अपने घरों की खिड़कियों से नारे लगाने लगे और फिर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। अब तक इन प्रदर्शनों में करीब 45 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को चेतावनी दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हिंसा करती है तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, जैसा वे पहले करते रहे हैं तो हम उन्हें बहुत सख्त जवाब देंगे। ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें आज़ादी के लिए मजबूती से खड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान कभी एक महान देश था, लेकिन आज वहां के हालात दुखद हैं।

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे ईरान के पूर्व शाह के बेटे रेजा पहलवी से मुलाकात करेंगे तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है। ट्रंप ने कहा कि मैं उनसे मिल चुका हूं, वे अच्छे इंसान लगते हैं, लेकिन अभी यह सही समय नहीं है। हमें देखना चाहिए कि आखिर कौन सा नेता उभरकर सामने आता है।

इजरायल देगा साथ?

पिछले साल जून में ईरान और इजरायल के बीच भयानक युद्ध हुआ था। दोनों देशों के बीच लंबे समय से दुश्मनी चली आ रही है। उस दौरान इजरायल ने अमेरिका के समर्थन से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने भी हमले किए थे। इस युद्ध के आखिरी दिनों में अमेरिका भी सीधे शामिल हो गया था। अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान परमाणु संयंत्रों को भारी नुकसान पहुंचा था।

अब एक बार फिर अमेरिका के ईरान पर हमले की आशंका जताई जा रही है। इस पर अमेरिका में इजरायल के राजदूत माइक हकाबी ने कहा है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो इजरायल उसका समर्थन करेगा। हालांकि हवाई हमलों का फैसला इजरायल खुद करेगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक नए हमले की योजना को मंजूरी दे दी है। इस मुद्दे पर ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हाल ही में बातचीत भी हुई थी।

पूरे देश में हिंसा और आगजनी

ईरान की राजधानी तेहरान और देश के कई हिस्सों में हालात बेहद बिगड़ चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई मस्जिदों और इमारतों में आग लगा दी है। सड़कों पर हिंसा और आगजनी का दौर जारी है। लोग नारे लगा रहे हैं कि जब तक मुल्लाओं का शासन रहेगा, तब तक देश में खुशहाली नहीं आएगी। आजादी, आजादी के नारे लगाते हुए लोग खामेनेई को सत्ता से हटाने की मांग कर रहे हैं।

महंगाई और बेरोजगारी से शुरू हुआ आंदोलन

यह आंदोलन ईरान की खराब आर्थिक स्थिति से शुरू हुआ था। ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत तेजी से गिर रही है और महंगाई लगातार बढ़ रही है। धीरे-धीरे यह आंदोलन सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल गया। आज ईरान के सभी 31 प्रांतों और 100 से ज्यादा शहरों में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

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